क्या अब मोदी सरकार घरों में भी नमाज नहीं पढ़ने देगी! – असदुद्दीन ओवैसी

नई दिल्ली: मुरादाबाद के दूल्हे पुर गांव में दो घरों में लोगों ने जमात की नमाज पढ़ी तो हंगामा खड़ा हो गया जिसको लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है इसके बाद गांव वालों की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच करते हुए 26 लोगों पर नामजद केस दर्ज किया है। जिन पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगा है।

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी का इस मामले पर बड़ा बयान सामने आया है। इस पर असदुद्दीन ओवैसी ने मुरादाबाद पुलिस और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को अहम जिम्मेदार ठहराया है उन्होंने कहा है कि क्या अब लोगों का घरों में नमाज पढ़ना भी गैरकानूनी हो गया है खुले में नमाज पढ़ने को लेकर सभी को आपत्ति होती है तो क्या अब मुसलमान घरों में भी नमाज नहीं पढ़ सकेंगे

ओवैसी ने ट्विटर के जरिए पीएम मोदी से यह सवाल पूछा है क्या अब नमाज पढ़ने के लिए भी हुकूमत या पुलिस से इजाजत लेनी होगी नरेंद्र मोदी को इसका जवाब देना चाहिए कब तक मुसलमानों के खिलाफ नफरत की राजनीति चलती रहेगी वहीं उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा है कि समाज में कट्टरपंथियों ने अपनी हद पार कर दी है वह अब दूसरों को घरों में नमाज पढ़ने से भी रोकने लगे हैं।

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दरअसल यह मामला मुरादाबाद के दोगले पुर गांव का है जहां पर स्थानीय लोगों ने पुलिस से लोगों के सामूहिक नमाज पढ़ने को लेकर शिकायत की जिसमें पुलिस ने 26 लोगों को नामजद किया है तथा 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी 505 -2 ( धार्मिक पूजा के प्रदर्शन में लगे एक सभा में सार्वजनिक शरारत के लिए बयानल के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

शिकायत कर्ताओं का यह कहना है कि इससे पहले यहां पर कभी भी सामूहिक तरीके से नमाज नहीं पढ़ी गई है। जिससे लोगों को लगता है कि यदि मुसलमान एक साथ नमाज पढ़ेंगे तो माहौल खराब हो सकता है। शिकायत करता हूं का यह भी कहना है कि यहां पर नई परंपरा शुरू की जा रही है इससे पहले भी एक बार नमाज इसी तरह से पढ़ी गई थी तब भी हमने शिकायत की थी तो इन लोगों ने नमाज पढ़ना इस सामूहिक तरीके से बंद कर दिया था।

अब यह सवाल मन में आ रहा है कि क्या किसी के एक साथ नमाज पढ़ने से कोई माहौल खराब हो सकता है या इसमें दूसरे राजनीतिक पार्टियों का हाथ हो सकता है जिससे गांव का माहौल खराब हो जाए आपको क्या लगता है कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर पेश करें।

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