ब्लॉग

गहलोत को अध्यक्ष बनाकर कांटे से कांटा निकालने की जुगत में है कांग्रेस
बड़ी खबर, ब्लॉग

गहलोत को अध्यक्ष बनाकर कांटे से कांटा निकालने की जुगत में है कांग्रेस

नई दिल्ली(राजाज़ैद)। कांग्रेस में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर अब तस्वीर साफ़ होने लगी है। अब यह बात पूरी तरह साफ़ हो चुकी है कि गांधी परिवार का कोई सदस्य कांग्रेस अध्यक्ष पद का उम्मीदवार नहीं होगा। वहीँ कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए जिन दो दावेदारों के नाम अभी तक सामने आये हैं उनमे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर हैं। हालांकि अभी भी संभावना है कि कुछ अन्य नेता भी कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी ठोंक सकते हैं। कांग्रेस में संगठनात्मक चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 24 से 30 सितंबर तक चलेगी। वहीँ नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि आठ अक्टूबर है। ऐसे में पार्टी की चुनावी तस्वीर 30 सितंबर को ही साफ़ हो पाएगी। जब ये तय हो जाएगा कि अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए कुल कितने नामांकन भरे जाते हैं। अभी तक की स्थिति में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलो...
2024 में बीजेपी को सत्ता से रोकने के लिए इन 7 राज्यों में विपक्ष को करनी होगी अच्छी फील्डिंग
बड़ी खबर, ब्लॉग

2024 में बीजेपी को सत्ता से रोकने के लिए इन 7 राज्यों में विपक्ष को करनी होगी अच्छी फील्डिंग

नई दिल्ली(राजा ज़ैद)। 2024 के लोकसभा चुनावो में भले ही अभी खासा समय बाकी है लेकिन राजनीतिक गलियारों में चुनावी चर्चा अभी से शुरू हो गई है। इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2024 के चुनाव के लिए विपक्ष को एकजुट करने का एलान कर नए कयासों को जन्म दे दिया है। वैसे सच यह भी है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव भी विपक्ष की एकता को लेकर बड़े बयान दे चुके हैं लेकिन फर्क इतना है कि ममता बनर्जी और चंद्रशेखर राव 2024 के लिए विपक्ष के जिस गठजोड़ की बात कर रहे थे उसमे कांग्रेस का ज़िक्र नहीं था जबकि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार साफ़ कह चुके हैं कि चूंकि कांग्रेस सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी है इसलिए उसे किनारे रखकर विपक्ष का गठजोड़ संभव नहीं है। आज की स्थिति दे...
लड़कियों के अधिकार कहां है?
बड़ी खबर, ब्लॉग

लड़कियों के अधिकार कहां है?

ब्यूरो (निशा दानू)। हाल ही में संपन्न हुए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला शक्ति को नमन करते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सम्मान और अवसरों पर विशेष ज़ोर के साथ अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर विशेष ज़ोर देती रहेगी. इसके साथ साथ उन्होंने महिलाओं के स्वावलंबन के लिए हर स्तर पर प्रयास करने पर भी ज़ोर दिया ताकि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं और अधिकार उन्हें प्राप्त हो. इसमें कोई शक नहीं कि केंद्र से लेकर सभी राज्य सरकार महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करती रहती हैं. इसके अंतर्गत कई योजनाओं संचालित की जा रही हैं, फिर चाहे वह मुद्रा लोन के रूप में उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना हो या फिर सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत...
कोरोना के खतरे से फिर बढ़ेगा रोज़गार का संकट
बड़ी खबर, ब्लॉग

कोरोना के खतरे से फिर बढ़ेगा रोज़गार का संकट

ब्यूरो(बीना बिष्ट,उत्तराखंड)। देश में कोरोना के नए रूप ओमीक्रोन के बढ़ते आंकड़ों ने फिर से सभी के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. इस नए स्वरूप के खतरे को रोकने के लिए केंद्र से लेकर सभी राज्य सरकारों ने एहतियाती कदम उठाना शुरू कर दिया है. एक जगह इकट्ठा होकर नए साल के जश्न मनाने पर पाबंदी लगा दी गई है, वहीं शादी-ब्याह और अन्य समारोह पर भी लोगों की संख्या को सीमित कर दिया गया है. कुछ राज्यों ने नाईट कर्फ्यू भी लगाना शुरू कर दिया है. दरअसल दूसरी लहर की त्रासदी ने सभी को एक सबक सिखाया है, जिसके बाद से कोई भी सरकार खतरा मोल नहीं लेना चाहती है. हालांकि अफसोसनाक पहलू यह है कि सरकार के तमाम प्रयासों पर स्वयं जनता ही पानी फेरने पर आमादा नज़र आ रही है. ग्रामीण क्षेत्रों से कहीं अधिक देश के महानगरों के बाज़ारों में बढ़ती भीड़ एकबार फिर से महामारी को आमंत्रण दे रही है. लोग सरकार की गाइडलाइन की धज्जिय...
किसान मोर्चे के नए दांव से फिर मुश्किल हुई बीजेपी की राह
बड़ी खबर, ब्लॉग

किसान मोर्चे के नए दांव से फिर मुश्किल हुई बीजेपी की राह

नई दिल्ली(राजा ज़ैद)। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। विधानसभा चुनावो में किसान आंदोलन से बड़े नुक्सान की संभावनाओं को देखते हुए भले ही पीएम नरेंद्र मोदी ने कृषि कानून वापस लेने का एलान कर दिया लेकिन संयुक्त किसान मोर्चे द्वारा सरकार के समक्ष रखी गई 6 शर्तो के बाद अब किसान आंदोलन की समाप्ति की दिशा में नया पेंच पैदा हो गया है। जैसे कि कयास लगाए जा रहे थे कि विधानसभा चुनाव आते आते भारतीय जनता पार्टी किसान आंदोलन समाप्त कराने के लिए किसी भी लक्ष्मण रेखा को पार करेगी। हुआ भी वैसा ही, शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने अचानक ही राष्ट्र के नाम अपने संदेश में तीन कृषि कानून वापस लेने का एलान करते हुए आंदोलनकारी किसानो से आंदोलन समाप्त कर अपने घरो को वापस लौटने की अपील कर दी। पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानूनों के वापस...
पढ़ने-पढ़ाने की जिद ने तमन्ना को बनाया रोल मॉडल
बड़ी खबर, ब्लॉग

पढ़ने-पढ़ाने की जिद ने तमन्ना को बनाया रोल मॉडल

ब्यूरो (रूबी सरकार- भोपाल, मप्र) । मध्यप्रदेश के हरदा जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव है नजरपुरा. इस गांव में अधिकतर पिछड़ी जाति के लोग निवास करते हैं. यहां की कुल आबादी 3 हजार, 940 है और 780 घर हैं. इनकी आजीविका का एकमात्र स्रोत मेहनत मजदूरी है. कुछ लोगों के पास नाममात्र की जमीन है, जिस पर वे खेती करते हैं, बाकी तो सब खेतीहर मजदूर ही हैं. इसी गांव के रहने वाले हैं कमल तंवर, जो गांव में सबसे अधिक पढ़े लिखे व्यक्ति हैं. वर्तमान में वह एक सरकारी स्कूल में अतिथि शिक्षक हैं. कहते हैं न, कि परिवार में एक शिक्षित हो तो सभी में पढ़ने की ललक जाग जाती है. कमल तंवर की 17 वर्षीय एक बेटी तमन्ना तंवर अपने पिता के नक़्शे कदम पर चल पड़ी है. तमन्ना न सिर्फ खुद पढ़ना चाहती है, बल्कि पूरे गांव के बच्चों को शिक्षित देखना चाहती है. कोविड-19 महामारी के दौरान जब से स्कूल-कॉलेज बंद रहे और बच...
लेख: मिलावटी मिठाइयों का बढ़ता कारोबार
बड़ी खबर, ब्लॉग

लेख: मिलावटी मिठाइयों का बढ़ता कारोबार

ब्यूरो (फ़िरदौस ख़ान)। त्यौहार के दिनों मे बाज़ार में नक़ली मावे और पनीर से बनी मिठाइयों का कारोबार ज़ोर पकड़ लेता है. आए-दिन छापामारी की ख़बरें सुनने को मिलती हैं कि फ़लां जगह इतना नक़ली या मिलावटी मावा पकड़ा गया, फ़लां जगह इतना. इन मामलों में केस भी दर्ज होते हैं, गिरफ़्तारियां भी होती हैं और दोषियों को सज़ा भी होती है. इस सबके बावजूद मिलावटख़ोर कोई सबक़ हासिल नहीं करते और मिलावटख़ोरी का धंधा बदस्तूर जारी रहता है. त्यौहारी सीज़न में कई मिठाई विक्रेता, होटल और रेस्टोरेंट संचालक मिलावटी और नक़ली मावे से बनी मिठाइयां बेचकर मोटा मुनाफ़ा कमाएंगे. ज़्यादातर मिठाइयां मावे और पनीर से बनाई जाती हैं. दूध दिनोदिन महंगा होता जा रहा है. ऐसे में असली दूध से बना मावा और पनीर बहुत महंगा बैठता है. फिर इनसे मिठाइयां बनाने पर ख़र्च और ज़्यादा बढ़ जाता है, यानी मिठाई की क़ीमत बहुत ज़्यादा हो जाती है. इतनी महंगाई में लोग ज़्यादा महं...
कांग्रेस में नई हलचल- माजरा क्या है ?
बड़ी खबर, ब्लॉग

कांग्रेस में नई हलचल- माजरा क्या है ?

ब्यूरो (जावेद अनीस)। कांग्रेस के संकट पर चर्चा अब उबाऊ हो चला है, यह बहुत लम्बे समय से चला आ रहा है. 2014 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उनका यह संकट गहराता ही गया है. 2019 में राहुल गाँधी के इस्तीफ़ा के बाद से तो यह संकट ही दिशाहीन सा लगने लगा है. लेकिन इधर कांग्रेस पार्टी में घटी दो घटनाएं ध्यान खीचने वाली है, एक पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन और दूसरा कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी का पार्टी में शामिल होना. कांग्रेस पार्टी के लिए कैप्टेन अमरिंदर सिंह सरीखे नेता को मुख्यमंत्री पद से हटाना और कन्हैया, जिग्नेश जैसे ठोस विचारधारा वाले युवा नेताओं को पार्टी में शामिल करना कोई मामूली फैसला नहीं है. तो क्या इसे पार्टी पर राहुल और प्रियंका गांधी के नेतृत्व को स्थापित करने और उनके हिसाब के नयी कांग्रेस पार्टी गढ़ने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा सकता है? अगर ऐसा है तो कांग्रेस अपने इस अंतहीन से ल...
जावेद अनीस का लेख: काबुल का फ़ितना
बड़ी खबर, ब्लॉग

जावेद अनीस का लेख: काबुल का फ़ितना

ब्यूरो (जावेद अनीस)। तालिबान वापस आ गये हैं, इस बार पहले से अधिक मजबूती, स्वीकार्यता और वैधता के साथ. नाइन इलेवन के ठीक पहले उनकी यह वापसी उसी अमरीका से समझौते के बाद हुयी है जिसने 2001 में उन्हें सत्ता से बेदखल किया था. तालिबान के इस जीत की मुद्रा दुनिया के महाबली अमरीका के खिलाफ विजेता की तरह है. जिस अंदाज से अमरीका ने अफगानिस्तान से अपना पीछा छुड़ाया है उससे दुनिया भर में यह धारणा बनी है कि अफगानिस्तान से अमरीका की वापसी नहीं हुई है बल्कि वह पीठ दिखाकर भगा है. दूसरी तरफ तालिबान के प्रति यह सोच बनी है कि वे वैश्विक महाशक्तियों से लोहा ले सकते हैं. दुनिया भर के इस्लामी कट्टरपंथी भी तालिबान की इस कामयाबी को लेकर गदगद हैं. इधर तालिबान दुनिया के सामने खुद का अधिक स्वीकार्य चेहरा पेश करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं इस बार वे डिप्लोमेसी और छवि निर्माण के महत्व को सीख गये लगते हैं. इस बार उनका स...
महिलाओं के लिए नहीं बदले आज़ादी के मायने
बड़ी खबर, ब्लॉग

महिलाओं के लिए नहीं बदले आज़ादी के मायने

ब्यूरो (अर्चना किशोर, छपरा, बिहार)। आज़ादी का दिन हर भारतवासी चाहे वह समाज के किसी भी तबके का हो, इस दिन को अच्छे से जानता व पहचानता है। इस वर्ष हम आज़ादी की 74 वीं सालगिरह मनाने जा रहे हैं। 74 सालों में 21वीं का भारत निर्भर से आत्मनिर्भर तक का सफर सफलतापूर्वक तय कर चुका है। युवा शक्ति के सहारे भारत ने ज़मीन से लेकर अंतरिक्ष तक कामयाबी के झंडे गाड़ दिए हैं। आज विश्व महाशक्तियां भारत को साथ लेकर ही विकास का तानाबाना बुनना चाहती हैं। आज़ादी से पहले जिस भारत की संकल्पना की गई थी, आज वह लगभग साकार होने को है। लेकिन सवाल यह है कि क्या हम अब तक अपनी आज़ादी के मायने को सही तरीके से समझ पाए हैं? आज़ादी की खुशी, खुली हवा में इसे महसूस करने से होनी चाहिए। लेकिन महिलाओं के प्रति आज भी समाज की संकीर्ण मानसिकता कभी कभी आज़ादी महसूस नहीं होने देती। हालांकि हालात बहुत बदले हैं। आज महिलाएं लगभग हर क्षेत्र म...