सांसदों के निलंबन पर सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं, खड़के बोले, ‘ये तानाशाही है’

सांसदों के निलंबन पर सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं, खड़के बोले, ‘ये तानाशाही है’

नई दिल्ली। निलंबित सांसदों के मामले में सरकार और विपक्ष के बीच अभी भी गतिरोध जारी है। इस बीच राज्य सभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़के ने कहा कि सदन में जो अड़चनें पैदा हो रही हैं, उसके लिए सरकार जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि सरकार तानाशाही कर रही है। हमारी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। सदस्यों का निलंबन रद्द नहीं होने तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी। हमने सदन को चलाने की बहुत कोशिशें कीं और बार-बार हम सदन के नेता और चेयरमैन दोनों से मुलाकात करते रहे। हमने अपनी बात भी रखी कि जिस नियम 256 के तहत जब आप उनको सस्पेंड कर रहे हैं तो उस नियम के मुताबिक ही आप सस्पेंड कर सकते हैं।

खड़गे ने कहा कि उन्होंने उन नियमों को छोड़ दिया और गलत तरीके से, मॉनसून सत्र में जो घटनाएं घटी थी। उसे इस जारी सत्र में लाकर हमारे 12 सदस्यों को निलंबित कर दिया। निलंबित करने के बाद भी हमने उनको कहा कि संविधान की धारा 82 (2 ए) के तहत वो हमें बर्खास्त नहीं कर सकते। जब तक की हर एक सदस्य की क्या गलती है, उसने क्या किया, उसके बारे में उसे पहले बताया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसे में सभी 12 लोगों से पूछना पड़ेगा. उसके बाद रिज्योलूशन मूव होगा और उसी दिन बर्खास्तगी होगी, यानी 11 अगस्त 2021 को यह होना चाहिए था। लेकिन उस दिन की घटना को इस सत्र में लाए। हाउस को परोरोग किया। जब हाउस परोरोग होता है, तब उनको सस्पेंड करने का अधिकार नहीं रहता, क्योंकि पिछले सेशन में जो घटनाएं घटीं, वो सब लैप्स हो जाती है. लेकिन फिर भी उन्होंने 2 चीजें एक तो परोरोग का है, उसी के तहत नहीं कर सकते। दूसरा यह है कि हाउस अडजर्न होता, तो उनको वो हक मिलता था। लेकिन फिर भी संविधान के तहत भी उनके कदम नहीं हैं और रुल्स के तहत भी उनके ये एक्शन्स नहीं है।

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खड़गे ने कहा कि संविधान के तहत यह फैसला नहीं लिया गया। नियम के मुताबिक भी यह कदम सही नहीं है। गैर लोकतांत्रिक तरीके से बर्खास्तगी हो रही है। हम बार-बार चेयरमैन से अनुरोध कर रहे हैं कि आप संविधान के रक्षक हो. हमारे सदस्यों को अधिकारों की हिफाजत करना आपका फर्ज होता है।

खड़गे ने कहा कि क्या वे सरकार के दबाव में हैं। क्या सरकार नहीं चाहती, या फिर सरकार उन्हें गलत दिशा-निर्देश दे रही है। हमें मालूम नहीं हैं, लेकिन हमारे सदस्यों को बर्खास्त किया गया।

उन्होंने कहा कि हम इस सत्र में बहुत से मुद्दे से उठाना चाहते थे। नागालैंड के मुद्दे को भी उठाना चाहते हैं। निलंबित सदस्यों को बहस में शामिल नहीं होने दिया। हम चर्चा करना चाहते थे, लेकिन उन्होंने बार-बार सदन को स्थगित किया। वो दिन में कम से कम 6-7 बार सदन स्थगित करते हैं। इससे यह लगता है कि सरकार की मंशा सदन को चलाने की नहीं है।

खड़के ने कहा कि जब तक सदस्यों का निलंबन रद्द नहीं होगा तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि निलंबन रद्द करने की मांग पर एक दिन हम धरना-प्रदर्शन करेंगे। हमने लोकसभा सदस्यों से अपील की है कि वे भी धरना में शामिल हों। हमारी आवाज को दबाने की कोशिश है जो सही नहीं है। यह तानाशाही है। हम इसे होने नहीं देंगे और इसके खिलाफ लड़ते रहेंगे।

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