ये है इंडिया: दो कोरोना संक्रमित महिलाओं की जान बचाने के लिए मुस्लिम युवक ने तोड़ा रोज़ा

उदयपुर। देश की सियासत भले ही कुछ पार्टियों के लिए हिन्दू मुस्लिम का खेल खेलकर सत्ता तक पहुंचने का रास्ता बनाती हो लेकिन इस देश में आज भी भाईचारा ज़िंदा है। इसकी जीती जागती मिसाल राजस्थान के उदयपुर में उस समय देखने को मिली जब कोरोना पीड़ित दो महिलाओं की ज़िंदगी बचाने के लिए प्लाज्मा डोनेट करने कोई और नहीं बल्कि एक मुस्लिम युवक आगे आया और उसने अपना रोज़ा तोड़कर दोनों महिलाओं को प्लाज्मा डोनेट किया।

दरअसल, उदयपुर के रहने वाले अकील मंसूरी को सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि दो कोरोना संक्रमति महिलाओं को प्लाज्मा की जरूरत है। दोनों महिलाओं का ब्लड ग्रुप A+ है। इसके बाद वो सीधा अस्पताल के लिए रवाना हो गए।

मंसूरी ने रोजा रखा हुआ था, इसलिए डॉक्टरों ने अकील को कुछ खाने के लिए कहा। इस पर अकील ने बिना कुछ सोचे अपना रोजा तोड़ दिया और प्लाज्मा डोनेट किया।

अकील मंसूरी पेशे से सिविल कॉट्रेक्टर हैं। लोकभारत से बातचीत में अकील ने कहा कि किसी की जान बचाना अल्लाह को बेहद पसंद है। जो रोज़ा आज मैंने तोडा है, मैं उसे ईद के बाद रखुंगा। मैं किसी की जान बचाने में काम आया, ये मेरे लिए गर्व की बात है।

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अकील ने कहा कि इस्लाम इंसानियत और नेकदिली का पैगाम देता है, मैंने दो महिलाओं को प्लाज्मा डोनेट कर किसी पर कोई अहसान नहीं किया है बल्कि इंसानियत बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि मैंने प्लाज्मा हिन्दू महिलाओं को डोनेट किया इसके कोई मायने नहीं है बल्कि मैं किसी के काम आया ये मायने रखता है। अकील द्वारा प्लाज्मा डोनेट के लिए आगे आने पर कोरोना पीड़ित महिलाओं के परिजनों ने उनका न सिर्फ शुक्रिया किया बल्कि उन्हें सराहा भी।

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