कर्नाटक विधानसभा चुनाव: जेडीएस ने 5 महीने पहले ही जारी कर दी 93 उम्मीदवारों की लिस्ट

कर्नाटक विधानसभा चुनाव: जेडीएस ने 5 महीने पहले ही जारी कर दी 93 उम्मीदवारों की लिस्ट

बेंगलुरु। कर्नाटक में अगले वर्ष मई तक विधानसभा चुनाव होने की संभावना है लेकिन जनता दल सेकुलर ने सभी दलों से पहले अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है।

सोमवार को जनता दल सेकुलर (जेडीएस) ने राज्य के विधानसभा चुनाव के लिए 93 उम्मीदवारो के नाम वाली पहली लिस्ट करी कर दी। हालांकि अभी विधानसभा चुनाव में काफी समय बाकी है और उम्मीद की जा रही है कि अगले वर्ष मई तक कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होंगे।

जद (एस) द्वारा जारी की गई सूची में कर्नाटक के उत्तरी कर्नाटक में बेलगावी के खानापुर से लेकर दक्षिणी कर्नाटक के चामराजनगर जिले के हनूर तक लगभग सभी जिलों के उम्मीदवार शामिल हैं।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सी एम इब्राहिम ने एक बयान में कहा पूर्व प्रधानमंत्री और जद (एस) सुप्रीमो एच डी देवेगौड़ा की सहमति के बाद उम्मीदवारों के नाम की सूची जारी की गई है।

जद (एस) ने गौड़ा के बेटे और पोते – एच डी कुमारस्वामी और निखिल कुमारस्वामी को क्रमशः पार्टी के ‘पहले परिवार’ को टिकट दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री, एच डी कुमारस्वामी, चन्नापटना से चुनाव लड़ेंगे, कुमार स्वामी ने 2018 में स्थानीय हैवीवेट सीपी योगेश्वर को हराकर चुनाव जीता था।

वहीँ कुमारस्वामी के बेटे निखिल पार्टी के गढ़ रामनगर से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने 2019 में मांड्या लोकसभा चुनाव लड़ा था और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सुमलता अंबरीश से हार गए थे।

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इसके अलावा पार्टी मौजूदा विधायक जी टी देवेगौड़ा को न केवल चामुंडेश्वरी निर्वाचन क्षेत्र से टिकट दिया गया है, बल्कि उनके बेटे हरीश गौड़ा को भी हुनसुर से उम्मीदवार बनाने का एलान किया गया है।

जद(एस) मीडिया टीम के प्रभारी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ”हम सभी 32 मौजूदा विधायकों को टिकट दे रहे हैं।” गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में जनता दल सेकुलर ने 37 सीटें जीती थीं। हालांकि, उनमें से पांच ने जुलाई 2019 में कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली जद (एस) और कांग्रेस की गठबंधन सरकार के खिलाफ तख्तापलट करते हुए कर्नाटक विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था।

ये पांच विधायक तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार द्वारा अयोग्य ठहराए गए 18 विधायकों में शामिल थे। अयोग्यता के बाद, गठबंधन सरकार गिर गई और भाजपा सत्ता में आई। अयोग्य विधायकों में से अधिकांश भाजपा में शामिल हो गए, 2019 दिसंबर में उपचुनाव लड़े, चुनाव जीते और नई सरकार में मंत्री बने।

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TeamDigital