विशेष : हिन्दुओं में भी लोकप्रिय थे हाशिम अंसारी, चाहते थे बाबरी मस्जिद मुद्दे का सौहार्दपूर्ण समाधान

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ब्यूरो । बाबरी मस्जिद मामले के पैरोकार हाशिम अंसारी बेहद सुलझे हुए और साफ़ सुथरी छवि वाले व्यक्ति थे । वे सिर्फ मुस्लिम समुदाय में ही नहीं बल्कि गैर मुस्लिमो में भी लोकप्रिय थे । चचा के नाम से मशहूर हाशिम अंसारी देश में अमन चैन के पक्षधर थे तथा बाबरी मस्जिद राम मंदिर मुद्दे का सौहार्द पूर्ण हल चाहते थे ।

हाशिम अंसारी के गैर मुस्लिम लोगों से पारिवारिक ताल्लुकात थे । हिन्दू समुदाय के लोग उन्हें अपने यहाँ शादी संबंधों में आमंत्रित करते थे और कई त्यौहारों के मौकों पर हाशिम अंसारी हिन्दू समुदाय के कार्यक्रमों में शरीक होते थे । हिन्दुअों के त्यौहार पर हाशिम अंसारी साधु-संतों अौर हिंदू धर्मानुयायियों को बधाई देना नहीं भूलते थे, वहीं हिंदू साधु-संत मुस्लिम त्यौहारों पर उनके घर जाकर बधाई देते थे।

हासिम अंसारी और महंत ज्ञानदास के बीच पुरानी दोस्ती के बारे में पूरे अयोध्या को मालूम है । कुछ दिनों से हाशिम अंसारी का स्वास्थ्य खराब होने और चलने फिरने में असमर्थ होने के कारण इस बार ईद की बधाई देने के लिए खुद ज्ञानदास उनके आवास पर पहुंचे थे। इस मौके पर उन्होंने अपने हाथों से मिठाई खिलाकर हाशिम अंसारी को ईद की बधाई दी।

कुछ दिन पहले हाशिम अंसारी ने कहा था कि मैं सन 1949 से मुकदमें की पैरवी कर रहा हूं। लेकिन आज तक किसी हिंदू ने मुझे एक लफ्ज़ गलत नहीं कहा। हमारा उनसे भाई चारा है। वो हमको दावत देते हैं। मै उनके यहां परिवार के साथ दावत खाने जाता हूं। हाशिम अंसारी कहा करते थे कि स्थानीय हिंदू साधु-संतों से उनके रिश्ते कभी खराब नहीं हुए। मैं जब भी उनके घर गया, हमेशा अड़ोस-पड़ोस के हिंदू युवक चचा-चचा कहते हुए उनसे बात करते हुए मिले।

1921 में पैदा हुए हाशिम अंसारी ने 1949 में पहली बार इस मामले में एक मुकदमा दर्ज करवाया था जब विवादिद ढांचे के भीतर कथित रूप से मूर्तियां रखी गई थीं। उनका कहना था कि लोगों के कहने के कारण ही उन्होंने ऐसा किया था। गौरतलब है कि 1961 में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस मामले में एक केस किया तब भी हाशिम अंसारी एक और पैरोकार बने।

इमरजेंसी के दौरान जेल में भी रहे हाशिम :
94 साल के हाशिम अंसारी बीते 60 सालों से इस केस को लड़ रहे थे. उन्होंने 1949 में पहली बार इस मामले में मुकदमा दर्ज करवाया था. उस समय विवादित ढांचे के भीतर कथित रूप से मूर्तियां रखी गईं थीं । इसके बाद साल 1975 में इमरजेंसी लगने के दौरान हाशिम अंसारी को गिरफ्तार किया गया. वह 8 महीने जेल में रहे थे ।

विवाद से ऊपर है दोस्ती :
विवादित स्थल के दूसरे प्रमुख दावेदारों में निर्मोही अखाड़ा के राम केवल दास और दिगंबर अखाड़ा के राम चंद्र परमहंस से हाशिम की अंत तक गहरी दोस्ती रही। परमहंस और हाशिम तो अक्सर एक ही रिक्शे या कार में बैठकर मुकदमें की पैरवी के लिए अदालत जाते थे और साथ ही चाय-नाश्ता करते थे।

नरसिम्हा राव को मानते थे ज़िम्मेदार :
एक इंटरव्यू में उन्होंने बाबरी मस्जिद गिराने के मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस के दिवंगत नेता और तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने अयोध्या में विवादित स्थल पर मौजूद मस्जिद तुड़वाई थी। अपने आवास पर मीडिया से बात करते हुए हाशिम ने बाबरी मस्जिद को बचाए न जाने पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा था कि ‘उन्हें (राव को) पहले से इस मामले की जानकारी थी, फिर भी कोई कदम नहीं उठाया गया। इसलिए मैं मानता हूं कि इस मामले में उनकी मुख्य भूमिका थी, भले ही वह मस्जिद गिराने के मुकदमे में मुलजिम नहीं बने।’

उन्होंने कहा था कि इस घटना के बाद नरसिम्हा राव ने मस्जिद को दोबारा बनवाने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने देश के मुसलमानों के साथ धोखा किया, मस्जिद नहीं बनवाई। निराश होकर उन्होंने कहा था कि शायद हमारे मरने के बाद मंदिर-मस्जिद का फैसला होगा। हाशिम अंसारी ने भाजपा और कांग्रेस पर इस मामले में आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों ही दल राजनीति कर रहे हैं और मुद्दे का हल निकालने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

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