बिहार रेलवे परीक्षा आंदोलन: कौन हैं खान सर, जो मुसलमान नहीं है फिर भी …..

नई दिल्ली। यूट्यूब से प्रसिद्द हुए खान सर, दरअसल मुसलमान नहीं हैं। फिर भी उन्हें अपने इस नाम से एतराज नहीं हैं। हालांकि उनके कई वीडियो विवादों के घेरे में भी हैं, जिनमे उन्होंने इस्लाम से जुड़े कुछ मामलो में मनगढ़ंत राय रखी है।

शिक्षक एवं यूट्यूबर ‘खान सर’ रेलवे भर्ती बोर्ड द्वारा गैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियों (एनटीपीसी) की नौकरियों के लिए आयोजित की जाने वाली परीक्षा के प्रारूप के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदर्शन को कथित तौर पर उकसाने के लिए विवादों में घिरे नजर आ रहे हैं।

खान सर छात्रों तक पहुंच बनाने के लिए यूट्यूब और डिजिटल मीडिया का उपयोग करके विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देने के लिए मशहूर हैं। वह पटना में ‘खान जीएस रिसर्च सेंटर’ के नाम से एक लोकप्रिय कोचिंग सेंटर भी चलाते हैं और अपनी अनूठी शिक्षण शैली के लिए जाने जाते हैं।

उन्होंने कभी भी अपने असली नाम का खुलासा नहीं किया और ज्यादातर लोग उन्हें सिर्फ ‘खान सर’ के नाम से जानते हैं। इससे पहले कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि उनका असली नाम अमित सिंह है। हालांकि, कुछ ने यह भी दावा किया कि उनका नाम फैसल खान है और वह उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले हैं।

जब भी उनसे उनके असली नाम के बारे में पूछा गया, तो खान सर ने कहा कि वह जिस कोचिंग संस्थान से जुड़े हैं, उसने उनके असली नाम या व्यक्तिगत संपर्क विवरण के बारे में कोई विवरण देने से इनकार कर दिया है।

बिहार में प्राधिकारियों ने पटना में हालिया हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद आरआरबी-एनटीपीसी द्वारा आयोजित की गई परीक्षा के परिणामों के विवाद पर कथित रूप से हिंसा भड़काने के लिए खान सर और पांच शिक्षकों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की है।

पटना में सोमवार और मंगलवार को हिरासत में लिए गए आंदोलनकारी छात्रों के बयानों के आधार पर खान सर और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि वे एक वीडियो के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने लेने के लिए प्रेरित हुए जिसमें खान सर ने कथित तौर पर छात्रों को तब सड़कों पर आंदोलन करने के लिए उकसाया था, यदि आरआरबी एनटीपीसी परीक्षा रद्द नहीं की गई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।

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प्राथमिकी में कहा गया है कि, पुलिस को मिले बयानों और वीडियो क्लिप के आधार पर, यह स्पष्ट है कि ‘‘आंदोलनकारी छात्रों ने कोचिंग संस्थान के मालिकों के साथ मिलकर कानून और व्यवस्था को खतरे में डालने के लिए पटना में बड़े पैमाने पर हिंसा करने की साजिश रची।’’

नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों ने नयी दिल्ली-कोलकाता मुख्य रेलवे ट्रैक को अवरुद्ध कर दिया था और कुछ अन्य लोगों ने बिहार के आरा और शरीफ रेलवे स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन किया था। बिहार के आरा में सैकड़ों गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर एक ट्रेन में आग लगा दी थी।

सोमवार को हिंसा भड़कने के बाद, खान सर ने परोक्ष तौर पर एक वीडियो जारी किया था जिसमें छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन करने की अपील की गई। उन्होंने कहा कि यदि वे हिंसा की ओर मुड़े तो कोई उनका समर्थन नहीं करेगा। खान सर ने अन्य शिक्षकों के साथ बृहस्पतिवार को एक और वीडियो जारी किया और छात्रों से कहा कि विरोध करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पहले ही आश्वासन दिया है कि ग्रुप डी पदों के लिए आवेदन करने वालों के लिए कोई दूसरी परीक्षा नहीं होगी और आरआरबी एनटीपीसी-सीबीटी-I के परिणाम भी संशोधित किए जाएंगे।

खान सर, बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के एक ट्वीट का हवाला देते दिखे, जिसमें मोदी ने केंद्रीय रेल मंत्री के साथ उनकी बातचीत के बारे में बात की थी।

आरआरबी-एनटीपीसी परीक्षा 2021 का परिणाम 15 जनवरी को घोषित किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन ने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया क्योंकि उम्मीदवार रेल पटरियों पर बैठ गए, एक ट्रेन में आग लगा दी और राज्य में विभिन्न स्थानों पर पथराव किया।

रेलवे ने यह भी कहा कि इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान तोड़फोड़ और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले सभी छात्रों को भविष्य की भर्ती में शामिल होने से रोक दिया जाएगा।

हालांकि, यूट्यूबर ने अपने खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने से पहले मीडियाकर्मियों से कहा था कि ‘‘अगर इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में उनकी भूमिका है तो उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।’’

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उन्होंने हिंसा के लिए आरआरबी को भी जिम्मेदार ठहराया क्योंकि उसने इंटरमीडिएट और स्नातक दोनों छात्रों को एक ही परीक्षा दी थी। उन्होंने दलील दी कि इससे स्नातक छात्रों को इंटरमीडिएट के छात्रों के मुकाबले फायदा हुआ।

खान सर पहली बार विवादों में नहीं घिरे हैं। इससे पहले उनके कई विवादित वीडियो क्लिप वायरल हो चुके हैं। हाल ही में, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 5 जनवरी की पंजाब के फिरोजपुर दौरे के दौरान संभावित ‘सुरक्षा चूक’ की व्याख्या करते हुए एक वीडियो जारी किया।

उन्होंने अपने वीडियो में कहा था, ‘‘प्रधानमंत्री का काफिला हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक के लिए सड़क मार्ग से गया क्योंकि मौसम की स्थिति के चलते उनका हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाया। यह घटना सुरक्षा में एक बड़ी चूक थी क्योंकि प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री के मार्ग तक जाने दिया गया, जबकि मार्ग को हरी झंडी देने वाले सुरक्षा कर्मियों के दल ने एसपीजी को आश्वासन दिया था कि मार्ग में कोई रुकावट नहीं है।’’

उन्होंने एसपीजी के वरिष्ठ अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया और कहा था कि प्रधानमंत्री के काफिले को लगभग आधे घंटे तक फ्लाईओवर पर रुकने देना एक बड़ी चूक थी। उन्होंने यह सवाल उठाया कि एनएसजी को पाकिस्तान सीमा के पास एक संवेदनशील फ्लाईओवर वाले स्थान से काफिले को वापस मोड़ने से किसने रोका।

इस बीच बिहार में कई राजनीतिक दल खान सर के समर्थन में उतर आए हैं। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राजग के घटक- हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने खान सर के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की है।

मांझी ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस तरह के कदम से छात्रों का आंदोलन और तेज हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘खान सर जैसे शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी छात्रों को बिहार में और अधिक अघोषित आंदोलन के लिए उकसा सकती है। सरकारों के लिए बेरोजगारी पर बात करने और समाधान निकालने का समय आ गया है।’’

इसी तरह, जन अधिकार पार्टी के नेता पप्पू यादव भी खान सर के समर्थन में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों और शिक्षकों का उत्पीड़न बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आरआरबी-एनटीपीसी आंदोलन मामले में शिक्षकों को निशाना बनाया जा रहा है।’’
(इनपुट भाषा)

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