कब्रिस्तान में खेलना, गाने सुनना हराम : दारुल उलूम

दारुल उलूम के मुफ्ती-ए-कराम ने दिए फतवे में कहा कि कब्रिस्तान को खेलगाह बनाकर वहां अभद्रता और अनैतिक कार्य करना नाजायज है। उन्होंने कहा कि गांव के जिम्मेदार लोगों को चाहिए कि वे कब्रिस्तान की चारदीवारी कराकर वहां अराजक तत्वों के आने-जाने पर पाबंदी लगाएं

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देवबंद । दारुल उलूम के मुफ्ती-ए-कराम ने दिए फतवे में कहा कि कब्रिस्तान को खेलगाह बनाकर वहां अभद्रता और अनैतिक कार्य करना नाजायज है। उन्होंने कहा कि गांव के जिम्मेदार लोगों को चाहिए कि वे कब्रिस्तान की चारदीवारी कराकर वहां अराजक तत्वों के आने-जाने पर पाबंदी लगाएं।

गांव सांपला खत्री के ग्रामीणों ने दारुल उलूम के मुफ्ती-ए-कराम से पूछा था कि गांव में स्थित कब्रिस्तान में कुछ लोग कबड्डी और कुश्ती के अखाड़े बनाकर कब्रों की बेहुरमति (बेइज्जती) कर रहे हैं। वहां शोर शराबा कर सिगरेट-बीड़ी पीते हैं और मोबाइल पर गाने आदि सुनते हैं। क्या यह ठीक है?

दारुल उलूम के मुफ्ती-ए-आजम मुफ्ती हबीबुर्रहमान की खंडपीठ जिसमें मुफ्ती वकार अहमद समेत अन्य मुफ्ती-ए-कराम शामिल थे, ने कहा कि कब्रिस्तान में खेल-अखाड़े करना नाजायज है।

मुफ्ती-ए-कराम ने कहा कि कब्रिस्तान में शोर-शराबे और अभद्रता जैसी चीजों और कब्रों पर मोटर साइकिल चलाने से हमें बचना चाहिए। जो लोग यह काम करते हैं वे गुनाहगार हैं। उन्होंने फतवे में गांव के जिम्मेदारों को हिदायत की कि वह कब्रिस्तान में चारदीवारी कराकर कब्रों की बेहुरमति होने से बचाएं।

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