राज्य सरकारों की दादागिरी पर सुप्रीमकोर्ट के ब्रेक, परेशान लोगों पर कार्रवाही होगी अवमानना

नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने आज अपने एक अहम आदेश में कहा कि परेशान नागरिको द्वारा सोशल मीडिया पर मदद मांगे जाने पर यदि कोई कार्रवाही की जाती है तो उसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।

सुप्रीमकोर्ट के इस अहम आदेश को को यूपी सरकार के हालिया ऐक्शन से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें सोशल मीडिया ऑक्सिजन की गुहार लगाने वाले एक युवक के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली तीन जजों की पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यदि नागरिक सोशल मीडिया और इंटरनेट पर अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं तो इसे गलत जानकारी नहीं कहा जा सकता है।’ कोर्ट ने कहा कि सभी राज्यों और डीजीपी को एक कड़ा संदेश जाना चाहिए। किसी भी जानकारी पर शिकंजा कसना मूल आचरण के विपरीत है।

पीठ ने साफ तौर पर कहा कि पेरशान नागरिकों के ऐसे किसी भी पोस्ट पर कार्रवाई होने पर हम उसे अदालत की अवमानना मानेंगे। न्यायालय ने टिप्पणी की कि अग्रिम मोर्चे पर कार्य कर रहे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी इलाज के लिए अस्पताल में बिस्तर नहीं मिल रहे हैं।

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शीर्ष अदालत ने केंद्र, राज्यों और सभी पुलिस महानिदेशकों को निर्देश दिया कि वे ऐसे किसी भी व्यक्ति पर अफवाह फैलाने के आरोप पर कोई कार्रवाई नहीं करे जो इंटरनेट पर ऑक्सीजन, बैड और डॉक्टरों की कमी संबंधी पोस्ट कर रहे हैं।

पीठ ने कहा कि हमें 70 साल में स्वास्थ्य अवसंरचना की, जो विरासत मिली है, वह अपर्याप्त है और स्थिति खराब है। शीर्ष अदालत ने कहा कि छात्रावास, मंदिर, गिरिजाघरों और अन्य स्थानों को कोविड-19 मरीज देखभाल केंद्र बनाने के लिए खोलना चाहिए।

पीठ ने कहा कि केंद्र को राष्ट्रीय टीकाकरण मॉडल अपनाना चाहिए क्योंकि गरीब आदमी टीका के लिए भुगतान करने में सक्षम नहीं होगा।

न्यायालय ने पूछा, ‘‘हाशिये पर रह रहे लोगों और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की आबादी का क्या होगा?क्या उन्हें निजी अस्पतालों की दया पर छोड़ देना चाहिए?’’

न्यायालय ने कहा कि सरकार विभिन्न टीकों के लिए राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम पर विचार करे और उसे सभी नागरिकों को मुफ्त में टीका देने पर विचार करना चाहिए।

पीठ ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र चरमराने के कगार पर है और इस संकट में सेवानिवृत्त डॉक्टरों और अधिकारियों को दोबारा काम पर रखा जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि निजी टीका उत्पादकों को यह फैसला करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए कि किस राज्य को कितनी खुराक मिलेगी। पीठ ने केंद्र को कोविड-19 की तैयारियों पर पावर प्वाइंट प्रस्तुति की अनुमति दे दी।

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