2024 में बीजेपी को सत्ता से रोकने के लिए इन 7 राज्यों में विपक्ष को करनी होगी अच्छी फील्डिंग

नई दिल्ली(राजा ज़ैद)। 2024 के लोकसभा चुनावो में भले ही अभी खासा समय बाकी है लेकिन राजनीतिक गलियारों में चुनावी चर्चा अभी से शुरू हो गई है। इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2024 के चुनाव के लिए विपक्ष को एकजुट करने का एलान कर नए कयासों को जन्म दे दिया है।

वैसे सच यह भी है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव भी विपक्ष की एकता को लेकर बड़े बयान दे चुके हैं लेकिन फर्क इतना है कि ममता बनर्जी और चंद्रशेखर राव 2024 के लिए विपक्ष के जिस गठजोड़ की बात कर रहे थे उसमे कांग्रेस का ज़िक्र नहीं था जबकि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार साफ़ कह चुके हैं कि चूंकि कांग्रेस सबसे पुरानी और सबसे बड़ी पार्टी है इसलिए उसे किनारे रखकर विपक्ष का गठजोड़ संभव नहीं है।

आज की स्थिति देखें विपक्षी दल बीजेपी से कम आपस में ज़्यादा उलझे हैं। विपक्षी दलों के नेता चुनाव से पहले तो विपक्ष की एकता की बात तो करते हैं लेकिन चुनाव तक एकता के स्वप्न को हकीकत में नहीं बदल पाते। जहां तक बीजेपी के खिलाफ विपक्षी दलों की एकता की संभावनाओं का सवाल है तो जिन राज्यों में विपक्ष ने गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा उन राज्यों में वही गठबंधन चुनाव बाद आरोप प्रत्यारोपों में बदल गया। उत्तर प्रदेश इसका बड़ा उदाहरण है।

2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन था लेकिन यह गठबंधन चुनाव बाद ज़िंदा नहीं रहा। 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन था और यह गठबंधन चुनाव बाद आरोप प्रत्यारोप में बदल गया।

हालाँकि, जिन राज्यो में गैर बीजेपी दलों ने गठबंधन कर सत्ता हासिल की वहां यह गठबंधन अभी भी बरकरार है। महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व में गैर बीजेपी दलों ने मिलकर सरकार बनाई और उद्धव सरकार के गिरने के बावजूद वहां गठबंधन बरकरार है। झारखंड और तमिलनाडु में गठबंधन की सरकारें चल रही हैं। बिहार में एक बार फिर गठबंधन सरकार बनी है।

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फिलहाल मान लिया जाए कि 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष का गठबंधन बन जाता है तो भी क्या बीजेपी को सत्ता से रोका जा सकेगा? आंकड़े बताते हैं कि यदि विपक्ष देश के उत्तर और पश्चिम के राज्यो में बीजेपी की कड़ी घेराबंदी करने में सक्षम होता है तो बीजेपी के धराशाही होने में कोई शक नहीं है।

जिन राज्यों में विपक्षी दलों को एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ उतरने की ज़रूरत है उनमे सबसे अधिक सीटों वाले उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक शामिल हैं। इन 7 राज्यों में लोकसभा की कुल 276 लोकसभा सीटें हैं।

इनमे उत्तर प्रदेश में 80, बिहार में 40, मध्य प्रदेश में 29, राजस्थान में 25 सीटें, गुजरात में 26 सीटें, महाराष्ट्र में 48 सीटें और कर्नाटक में 28 सीटें शामिल हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इन 7 राज्यों की कुल 276 सीटों में से 205 सीटें जीती थीं। इनमे बिहार में 17 सीटें, गुजरात में 26 सीटें, कर्नाटक में 25 सीटें, मध्य प्रदेश में 28 सीटें, ,महाराष्ट्र में 23 सीटें, राजस्थान में 24 सीटें और उत्तर प्रदेश में 62 सीटों पर बीजेपी का कब्ज़ा है।

जानकारों की मानें तो यदि इन 7 राज्यों में विपक्ष एकजुट होकर बीजेपी का चुनावी विजय रथ रोकने का माद्दा रखता है तो बीजेपी का सत्ता से बाहर होना तय है। अन्य राज्यों की बात करें तो इन 7 राज्यों की तुलना में अन्य राज्यों में बीजेपी को रोकना बहुत कठिन नहीं है।

शेष रहे राज्यों में कई ऐसे राज्य भी हैं जहां बीजेपी का खाता खुलना भी मुश्किल होता है। इनमे आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु जैसे राज्यों में बीजेपी को रोकने के लिए विपक्ष को ज़्यादा ताकत नहीं लगानी पड़ेगी।

वहीँ पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा ऐसे राज्य हैं जहां लोकसभा चुनावो पर राज्य की सत्ता का असर रहता है। इन तीनो ही राज्यों में गैर बीजेपी दलों की सरकार है।

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आंकड़ों का आंकलन करने से पता चलता है कि यदि चुनिंदा राज्यों में विपक्ष बीजेपी के खिलाफ मजबूत फील्ड सैट करता है तो विपक्ष अपनी मुहिम में कामयाब हो सकता है। इसके अलावा उत्तर भारत के अन्य राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में भी विपक्ष को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। इन राज्यों में बीजेपी पहले से ही काफी मजबूत है।

विपक्षी दलों को छोड़नी होगी अपनी ज़िद्द और घमंड:

2024 के लोकसभा चुनाव में यदि विपक्ष वाकई बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए गंभीर है तो यह भी ज़रूरी है कि विपक्ष के सभी दलों को एक प्लेटफॉर्म पर आना होगा। खासकर सीटों के बंटवारे को लेकर विपक्षी दलों को अभी से एक फॉर्मूला तय करना होगा।

हालांकि बीजेपी के खिलाफ विपक्ष का गठबंधन बनाना इतना आसान नहीं है। विपक्षी दलों के आपस के झगड़े और एक दूसरे को आगे बढ़ने से रोकना ही बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत है। मसलन पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का वामदलों और कांग्रेस के साथ 36 का आंकड़ा है।

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का बसपा और कांग्रेस के अलावा कुछ क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन में आना एक टेडी खीर है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच किसी तरह का गठबंधन हो पाए इसकी संभावनाएं भी बेहद कम हैं। तेलंगाना में कांग्रेस का सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति और एआईएमआईएम के साथ किसी तरह का गठबंधन बन पाना असंभव सा है।

ऐसे हालातो में 2024 के चुनाव के लिए विपक्ष के गठबंधन को लेकर कोई दावा नहीं किया जा सकता। गठबंधन हुआ तो उसकी शक्ल क्या होगी? किस राज्य में किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी? पीएम पद का दावेदार कौन होगा? ये कई ऐसे सवाल हैं जिनका जबाव आज नहीं दिया जा सकता लेकिन आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 2024 में बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए विपक्ष एकजुट हो पायेगा ?

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