2050 तक विदेशो से मंगाना पड़ सकता है पानी , प्रति व्यक्ति बचेगा सिर्फ 3120 लीटर

Water-crisis

ब्यूरो । देश के कई राज्यों में सूखा का संकट झेल रहे लोगों के लिए भविष्य में कोई बड़ी राहत मिलने की उम्मीद नज़र नहीं आती । बल्कि जानकार लोगों का मानना है कि क्लाइमेट चेंज का बड़ा प्रभाव मानसून पर पड़ा है जिसके चलते कई देशो को सूखा तो कई देशो में अधिक बारिश से बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है । सऊदी अरब जैसे मरुस्थल वाले देश में ज़रूरत से ज़्यादा बेमौसम बारिश और भारत में सूखा पड़ना भी जलवायु परिवर्तन की वजह से पैदा हुआ एक बड़ा कारण है ।

यदि आकड़ों पर गौर करें तो भविष्य में भारत को भारी जल संकट का सामना कर पड़ सकता है। देश में भूमिगत जल की मात्रा दिन प्रतिदिन तेजी से कम हो रहा है। तेजी से गायब हो रहे भूमिगत जल की स्थिति पर गौर करें, तो साल 2050 तक प्रति व्यक्ति के लिए 3,120 लीटर पानी ही बचेगा।

एक आंकड़े के मुताबिक 2001 की तुलना में 2016 में देश में प्रति व्यक्ति भूमिगत जल की उपलब्धि 5,120 लीटर रह गई है। वर्ष 1951 में भारत में प्रति व्यक्ति भूमिगत जल की उपलब्धता 14,180 लीटर थी। अब 1951 की तुलना में भूमिगत जल की उपलब्धता मात्र 35 फीसद ही रह गई है। 1991 में यह आधे पर पहुंच गई थी।

अनुमान के मुताबिक 2025 तक प्रति व्यक्ति के लिए प्रति दिन के हिसाब से 1951 की तुलना में केवल 25 फीसद भूमिगत जल ही शेष बचेगा। वहीं केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के आंकड़ों की माने तो वर्ष 2050 तक यह उपलब्धता घटकर 22 फीसद पर पहुंच जाएगी।

देश में जल संवर्धन का उचित प्रबंध न होने तथा बारिश के पानी को तालाब, झीलों और कुओं में जमा नहीं करने की सजगता, जागरूकता में कमी और घटती हरियाली भूमिगत जल के तेजी से खत्म होने के पीछे की कुछ प्रमुख वजहें हैं।

आंकड़े बताते हैं कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी और अन्य जरूरतों के लिए के लिए लगभग भूमिगत जल पर निर्भरता लगभग 85 फीसदी है, वहीं शहरी क्षेत्रों में भी लगभग 50 फीसदी जल की जरूरत भूमिगत जल स्रोत से ही पूरी होती है। इसके अतिरिक्त सबसे ज्यादा भूमिगत जल का दोहन कृषि कार्योंं में होता है। देश में होने वाली कुल कृषि में 50 फीसद सिंचाई का माध्यम भी भूमिगत जल ही है।

भारत की बढती जनसंख्या और इसके साथ ही जल की बढ़ती खपत के साथ ही अगर समय रहते इस विषय पर गंभीरता से सोचा नहीं गया तो वह दिन दूर नहीं जब भूमिगत जल का स्तर इतना घट जाएगा कि हमें पानी का निर्यात करना पड़ जाए। इस आशय की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय भूजल बोर्ड ने भूमिगत जल को रिस्टोर करने के लिए एक कृत्रिम योजना बनाई है।

अपनी राय कमेंट बॉक्स में दें

TeamDigital