सीएए के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास करने वाला पहला केंद्र शासित राज्य बना पुडुचेरी

सीएए के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास करने वाला पहला केंद्र शासित राज्य बना पुडुचेरी

नई दिल्ली। नागरिकता कानून के खिलाफ केरल, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के बाद अब केंद्र शासित राज्य पुडुचेरी की विधानसभा में प्रस्ताव पास किया गया है।

पुडुचेरी पहला ऐसा केंद्र शासित प्रदेश है जहाँ की विधानसभा में नागरिकता कानून, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पास हुआ है। पुडुचेरी सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास करने वाला देश का सातवां राज्य बन गया है।

बुधवार को विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाया गया था। मुख्यमंत्री वी नारायणसामी ने विपक्ष के बहिष्कार बीच सदन में सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध का प्रस्ताव रखा।

इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को वापस लेने की मांग की गयी।

विधानसभा में प्रस्ताव पेश होने के दौरान विपक्ष ने लोकतंत्र की हत्या’ और ‘संविधान प्रावधान के उल्लंघन’ जैसे नारे लगाने के साथ ही कार्यवाही का बर्हिगमन किया। विधानसभा अध्यक्ष वीपी सिवाकोलुंधु ने कहा कि प्रस्ताव को सर्वसम्मित से स्वीकार कर लिया गया है।

पुडुचेरी में पिछले काफी समय से उप राज्यपाल किरण बेदी और सरकार के बीच रस्साकशी जारी है। राज्य के मुख्यमंत्री वी नारायण सामी ने उपराज्यपाल किरण बेदी पर सरकार के काम में अनावश्यक दखल देने का आरोप भी लगाया था।

गौरतलब है कि नागरिकता कानून और एनआरसी के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। दिल्ली के शाहीन बाग़ में पिछले 60 दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहा है। वहीँ शाहीन बाग़ की तर्ज पर देश के अन्य कई शहरो में भी नागरिकता कानून वापस लेने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने शुरू किये गए हैं।

नागरिकता कानून और एनपीआर के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में करीब 145 याचिकाओं पर अभी सुनवाई होनी है। 22 जनवरी को इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीमकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जबाव तलब किया था।

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TeamDigital