गुरुग्राम में प्रशासन की अनुमति के बावजूद नमाज़ रोके जाने का मामला सुप्रीमकोर्ट पहुंचा

नई दिल्ली। गुरुग्राम में सार्वजनिक स्थलों पर जुमे की नमाज़ आयोजित किये जाने में बाधा डालने का मामला अब सुप्रीमकोर्ट पहुंच गया है। पूर्व राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब ने हरियाणा के मुख्य सचिव और डीजीपी के खिलाफ अवमानना की याचिका दायर की है।

याचिका में कहा गया है कि हरियाणा पुलिस और नागरिक प्रशासन उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहा, जिन्होंने मुसलमानों को सार्वजनिक आधार पर नमाज अदा करने से रोका। अदीब ने मामले में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पीके अग्रवाल और मुख्य सचिव संजीव कौशल के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की।

पूर्व सांसद की तरफ से याचिका दायर करने वाले एडवोकेट फुजैल अहमद अयूबी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मई 2018 से मुस्लिमों को प्रशासन की तरफ से 37 जगहों पर नमाज पढ़ने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन इसमें कुछ शरारती तत्व बाधा डालने की कोशिश काफी समय से कर रहे हैं।

गौरतलब है कि गुरुग्राम में फैक्ट्रियों और ऑफिसों में काम करने वाले प्रवासी आसपास के इलाको में खाली पड़ी जगह पर जुमे (शुक्रवार) की नमाज़ पढ़ते रहे हैं लेकिन पिछले कुछ जुमे के दौरान हिन्दू संगठनों ने सार्वजनिक स्थलों पर नमाज़ के आयोजन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किये। इतना ही नहीं पुलिस और प्रशासन की अनुमति के बावजूद कई जगह हिन्दू संगठनों ने नमाज़ में विघ्न डाला और नमाज़ नहीं होने दी।

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स्थानीय मुस्लिमो के मुताबिक, प्रत्येक जुमे को खुले में नमाज़ के आयोजन के लिए पुलिस से अनुमति ली जाती है। इसके बावजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है और नमाज़ में बाधा उत्पन्न करने वालो पर कोई कार्रवाही नहीं करती। यह सीधा सीधा प्रशासनिक आदेशों की अवमानना का मामला है। इसलिए इस मामले को सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है।

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