बंगाल में ममता ने बीजेपी पर शिकंजा कसा, रिवर्स गेयर में आई पार्टी

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में जिस स्पीड से बीजेपी आगे बढ़ रही थी अब उसके पलट पार्टी जहां से शुरू किया था वहीँ आकर ठहर गई है। चुनाव से दो-तीन महीने पहले से बंगाल में पसीना बहा रहे जेपी नड्डा और अमित शाह की मेहनत अब जबाव देने लगी है। ज़मीनी हकीकत बताती है कि बंगाल में बीजेपी अब रिवर्स गेयर में पहुंच चुकी है।

जानकारों की माने तो ममता के नंदीग्राम वाले दांव से बीजेपी को करारा झटका लगा है। अब पश्चिम बंगाल में गैर बंगाली और बंगाली का मुद्दा ज़ोर पकड़ चूका है। बीजेपी के लिए सबसे बड़ी मुसीबत यही है कि उसके बार केंद्र में कोई ऐसा बड़ा चेहरा नहीं है जिसे आगे करके चुनाव लड़ा जा सके।

बंगाल में चुनाव अभियान का नेतृत्व कर रहे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह से लेकर अन्य सभी बड़े चेहरे हिंदी भाषी है और उनका बंगाल की राजनीति से दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं है।

यही कारण है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह की सभाओं में कुर्सियां खाली दिख रहीं हैं और तमाम कोशिशों के बावजूद सभाओं में भीड़ नहीं आ रही। यहाँ तक कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में भी उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुटी जबकि बीजेपी ने भीड़ जुटाने के लिए धन बल का भरपूर इस्तेमाल किया।

वहीँ इसके पलट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सभाओं में भीड़ उमड़ रही है। खासकर नंदीग्राम हादसे के बाद ममता की दोनों सभाएं सफल रही हैं और जिन लोगों का रुझान बीजेपी की तरफ हो गया था वे वापस ममता की तरफ लौट रहे हैं।

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बीजेपी को उस समय बड़ी हताशा का सामना करना पड़ा जब झारग्राम जिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली के लिए एक सप्ताह से बीजेपी नेता पसीना बहा रहे थे। इसके बावजूद अमित शाह की रैली के दिन पांच सौ लोग भी जमा नहीं हो सके और जब इस बात की जानकारी अमित शाह को दी गई तो उन्होंने रैली कैंसिल करने का फरमान जारी कर दिया।

हालांकि बीजेपी ने शाह के हेलीकॉप्टर में तकनीकी खामियों का हवाला देकर रैली रद्द करने की बात कही लेकिन पार्टी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि रैली में भीड़ न पहुंचने के कारण अमित शाह की रैली रद्द की गई। इसके बाद गृहमंत्री अमित शाह ने वर्चुअल रैली को संबोधित किया।

बीजेपी नेताओं की सभाओं में भीड़ न जुटना महज एक संजोग नहीं है बल्कि ये चुनाव में ममता बनर्जी के बढ़ते प्रभाव का परिणाम है। रैली में भीड़ न जुटने का मामला सिर्फ गृह मंत्री अमित शाह या बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ ही नहीं है बल्कि सल्बोनी में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और पश्चिम मिदनापुर जिले के गोल्टोर में राजनाथ सिंह, पूर्वी मिदनापुर जिले के एगरा में नितिन गडकरी की सभा में भी भीड़ नहीं जुटी।

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यही हाल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभाओं का भी रहा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुरुलिया, बाकुरा और पश्चिम मिदनापुर की रैलियां फीकी रहीं और तमाम कोशिशों के बावजूद कुर्सियां खाली और भीड़ नदारद रही। सोशल मीडिया पर कई बीजेपी नेताओं की रैलियों में खाली पड़े मैदान और कुर्सियों की तस्वीरें वायरल हो रही हैं।

वहीँ सूत्रों की माने तो बीजेपी के अंदर तेजी से गुटबंदी पनप रही है। तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी में आये नेताओं को टिकिट दिए जाने से बीजेपी के कार्यकर्त्ता नाराज़ हैं वहीँ तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी में आये जिन नेताओं को टिकिट नहीं दिया गया उनके समर्थको ने भी बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और विधानसभा चुनाव में बीजेपी को सबक सिखाने का एलान किया है।

चुनाव जानकारों की माने ज़मीनी स्थिति अब पूरी तरह पलट चुकी है। ममता के खिलाफ चल रही बीजेपी की मुहिम अब उसे नुकसान दे रही है। अगर कुछ विधानसभाओं के शहरी इलाको को छोड़ दिया जाए तो बीजेपी अब बंगाल में पूरी तरह सिमट चुकी है और जब चुनाव परिणाम आएंगे तो वे इसकी पुष्टि कर देंगे कि ममता बनर्जी बीजेपी पर एक बार फिर अपना शिकंजा कसने में सफल रही हैं।

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