महाराष्ट्र में पीएमसी बैंक व किसान और हरियाणा में बेरोज़गार न कर दें काम तमाम

महाराष्ट्र में पीएमसी बैंक व किसान और हरियाणा में बेरोज़गार न कर दें काम तमाम

नई दिल्ली(राजाज़ैद)। महाराष्ट्र की 288 और हरियाणा की 90 सीटों के लिए होने जा रहे विधानसभा चुनाव में प्रचार पूरे उरूज पर पहुँच चूका है। सभी दलों के बड़े छोटे नेता चुनावी सग्राम में पसीना बहा रहे हैं। दोनों राज्यों में मतदान 21 अक्टूबर को होगा तथा 24 अक्टूबर को परिणाम घोषित किये जायेंगे।

अहम बात यह है कि महाराष्ट्र और हरियाणा दोनों ही जगह बीजेपी की सरकार है। ऐसे में बीजेपी राज्य में विकास कार्य न होने का दावा करके विपक्ष नहीं बना सकती।

दोनों राज्यों के चुनाव में बीजेपी भले ही अभी से जीत के दावे भर रही है लेकिन सच्चाई यह भी है कि दोनों राज्यों में एंटी इंकमबेंसी की हवा चलना शुरू हो गयी है और चुनाव का दिन आते आते यह किसी बड़े तूफ़ान की शक्ल भी ले सकती है।

ज़मीनी हकीकत देखी जाए तो हरियाणा में बेरोज़गारी और महाराष्ट्र में पीएमसी बैंक और किसानो का मुद्दा बीजेपी के गले की हड्डी साबित हो सकता है। देश में आर्थिक मंदी का बड़ा असर हरियाणा पर पड़ा है।

ऑटो सेक्टर में मंदी के चलते राज्य की कई फैक्ट्रियों में कर्मचारियों की छटनी हुई है। ये बेरोज़गारी सिर्फ मारुती या अन्य बड़ी कंपनियों में प्रोडक्शन कम करने के लिए प्लांट में बंदी के एलान से ही नहीं हुई बल्कि हरियाणा में 100 से अधिक ऐसी फैक्ट्रियां हैं जो मारुती, हीरो, बजाज, टाटा, अशोक लेलेंड, जैसी बड़ी कंपनियों के लिए ऑटोमोबाइल पार्ट्स बनाती थीं।

वाहन बनाने वाली कंपनियों द्वारा प्रोडक्शन कम किये जाने से ऑटो पार्ट्स सप्लाई करने वाली ओ ई कंपनियों पर भी बड़ा असर पड़ा है। गौरतलब है कि हरियाणा में ऑटोलॉक, क्लिक प्लेट, गेयर बॉक्स, स्विच गेयर, स्टेरिंग व्हील, रिम जैसे ऑटोमोबाइल पुर्जे बनाने की कई फैक्ट्रियां हैं जिनमे अब प्रोडक्शन कम किये जाने के चलते दैनिक वेतन भोगियों की बड़ी तादाद में छटनी की गयी है।

वहीँ दूसरी तरफ महाराष्ट्र में पीएमसी बैंक घोटाले में बीजेपी की बड़ी किरकिरी हुई है। पिछले दिनों यहाँ नोट बंदी जैसा माहौल था। पीएमसी बैंक के खातेदार इस कदर नाराज़ थे कि उन्होंने बीजेपी दफ्तर पर धावा बोलकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी घेर लिया।

महाराष्ट्र में दूसरा बड़ा मुद्दा किसानो से जुड़ा है। महाराष्ट्र देश का वो सबसे बड़ा राज्य है जहाँ किसानो द्वारा आत्म ह्त्या किये जाने की सर्वाधिक घटनाएं हुई हैं । ऐसे में राज्य के किसान मतदाता बीजेपी को आइना दिखाने की ताकत अवश्य रखते हैं।

चुनावी जानकारों की माने तो पिछले कई चुनावो की तर्ज पर इस बार भी ग्रामीण इलाको की तुलना में शहरी इलाको में बीजेपी ज़्यादा मजबूत दिखाई दे रही है। उत्तर महाराष्ट्र के कुछ इलाको को छोड़ दें तो राज्य के अन्य ग्रामीण इलाको में फ़िलहाल बीजेपी बहुत मजबूत दिखाई नहीं दे रही।

ऐसा ही कुछ हाल हरियाणा का भी है। शहरी इलाको में बीजेपी का प्रचार गति पकड़ चूका है वहीँ देहात के इलाको में वह अभी भी सभी जगह नहीं पहुँच पाई है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले चुनाव में जिस युवा मतदाता को बीजेपी ने कैश किया था इस चुनाव में उसी मतदाता को फिर से कैश कर पाना आसान नहीं होगा।

फिलहाल देखना है कि 21 अक्टूबर को मतदान के बाद जब 24 अक्टूबर को चुनावी नतीजे घोषित किये जाएंगे तो ज़मीनी हकीकत और परिणाम आपस में कितना मेल खाते हैं।

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TeamDigital