हंदवाड़ा हिंसा: पीड़ित लड़की के वकील का दावा, पुलिस ने दबाव बनाकर बयान लिया

हंदवाड़ा हिंसा: पीड़ित लड़की के वकील का दावा, पुलिस ने दबाव बनाकर बयान लिया

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श्रीनगर । हंदवाड़ा में छेड़छाड़ की कथित घटना से संबंधित लड़की के वकील ने सोमवार को दावा किया कि उनकी मुवक्किल ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष ‘स्वेच्छा से’ अपना बयान नहीं दिया और पुलिस की ओर से निर्देशित ढंग से बयान देने के लिए उस पर दबाव बनाया गया।

लड़की और उसके परिवार की पैरवी कर रही संस्था ‘जम्मू कश्मीर कोअलिशन ऑफ सिविल सोसायटी’ (जेकेसीसीएस) के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि पुलिस के समक्ष वीडियो रिकॉर्डिंग वाला बयान और सीजेएम के समक्ष सीआरपीसी की धारा 164-ए के तहत दर्ज बयान लड़की ने स्वेच्छा से नहीं दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस की ओर से निर्देशित ढंग से बयान देने के लिए लड़की पर दबाव बनाया गया था।

अपने बयानों में लड़की ने सेना के किसी जवान द्वारा छेड़छाड़ की बात से इंकार किया था। प्रवक्ता ने कहा कि रविवार (17 अप्रैल) को हंदवाड़ा में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष लड़की का बयान उसके पिता और वकीलों की गैरमौजूदगी में लिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘बयान रिकॉर्ड किए जाने के समय अदालत में लड़की के पिता मौजूद नहीं थे। उसके साथ अदालत में कोई वकील भी मौजूद नहीं था।’’

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘अदालत में न्यायाधीश के अलावा चार अन्य लोग थे जिनको यह नाबालिग बच्ची नहीं पहचान पाई।’’ उन्होंने कहा कि यह मामला उच्च न्यायायालय के समक्ष 20 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध हुआ है, लेकिन अगले 48 घंटे लड़की और उसके परिवार तथा उनकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

जेकेसीसीएस की कानूनी टीम ने रविवार (17 अप्रैल) रात लड़की और उसके परिवार से मुलाकात की और आरोप लगाया कि परिवार पर पुलिस की निरंतर निगरानी बनी हुई है। प्रवक्ता के अनुसार मुलाकात के दौरान लड़की और उसके परिवार वालों ने फिर से ये बात दोहराई कि वे उम्मीद करते हैं कि यह कानूनी टीम उनकी पैरवी करना जारी रखेगी।

प्रवक्ता ने दावा किया इन लोगों को 12 अप्रैल से अब तक गैरकानूनी ढंग से पुलिस हिरासत में रखा गया था तथा उनको धमकी, गाली-गलौज दी गई और निरंतर निगरानी में रखा गया है। उन्होंने कहा कि जेकेसीसीएस ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नईमा महजूर से भी संपर्क किया है जिन्होंने सहयोग का भरोसा दिया।

प्रवक्ता ने कहा कि जेकेसीसीएस ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, राज्य के पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक (कश्मीर), उप महानिरीक्षक (उत्तरी कश्मीर), मंडलीय आयुक्त (कश्मीर) और उपायुक्त (कुपवाड़ा) को पत्र लिखा है कि ‘परिवार तक वकीलों की निर्बाध पहुंच होनी चाहिए। अब तक सरकार ने जवाब नहीं दिया है।’

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