सुप्रीमकोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा :बादशाह अकबर भी पीते थे गंगाजल

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नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट उत्तराखंड में अलकनंदा और भागीरथी नदी पर प्रस्तावित और निर्माणाधीन 24 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट यानी पनबिजली परियोजनाओं पर रोक के मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से एक गैर ज़रूरी बयान दाखिल किया गया जिसका परियोजना से कोई लेना देना नहीं है ।

एक तरफ जहाँ केंद्र की मोदी सरकार के मंत्री जनरल वीके सिंह, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटटर और बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी दिल्ली के अकबर रोड का नाम बदलने की मांग उठाते रहे हैं वहीँ दूसरी तरफ सरकार सुप्रीम कोर्ट में एक परियोजना को शुरू  कराने के लिए बादशाह अकबर के नाम का सहारा ले रही है ।

केंद्र सरकार ने दावा किया कि मुगल सम्राट अकबर शुद्ध गंगाजल पीते थे या फिर अपने पानी में गंगाजल मिलाकर पीते थे। इतना ही नहीं जो भी मुगल बादशाह हुए वह भी गंगाजल की इस खासियत को मानते थे। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने यह जानकारी दी है।

सुप्रीम कोर्ट उत्तराखंड में अलकनंदा और भागीरथी नदी पर प्रस्तावित और निर्माणाधीन 24 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट यानी पनबिजली परियोजनाओं पर रोक के मामले की सुनवाई कर रहा है।

उत्तराखंड में जून, 2013 को आए जल प्रलय के बाद कोर्ट ने उत्तराखंड में अलकनंदा और भागीरथी नदी पर इन परियोजनाओं पर रोक लगा दी थी। अब कंपनियों ने रोक हटाने की मांग की है।

कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर जल संसाधन मंत्रालय ने गंगा को संरक्षित करने और उसे प्रदूषण मुक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता जताते हुए गंगा नदी के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का भी बखान किया है।

मंत्रालय ने खूबियां गिनाते हुए कहा कि दुनिया भर के लोगों का विश्वास है कि गंगाजल में कुछ ऐसे खास तत्व हैं जो किसी और नदी में नहीं है। गंगा नदी भारत की पहचान है। यह करीब 50 करोड़ लोगों के विश्वास और रोजी-रोटी कमाने का साधन है।

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