‘संसद में आतंकी’ वाले बयान पर साध्‍वी प्राची कायम, संसदीय कमेटी से कहा-माफी नहीं मांगूंगी

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नई दिल्ली । विहिप नेता साध्वी प्राची बुधवार को राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने पेश हुईं। उन्होंने ‘‘संसद में आतंकवादी’’ संबंधित अपनी विवादास्पद टिप्पणी पर रूख कायम रखा एवं माफी मांगने से इंकार कर दिया।

विपक्षी सदस्यों ने उनसे इस टिप्पणी के लिए माफी मांगने को कहा था। पी जे कुरियन की अध्यक्षता वाली समिति मॉनसून सत्र में प्राची की टिप्पणी को लेकर समीक्षा कर रही है। समिति ने उन्हें अपने समक्ष तलब किया था। बैठक के बाद साध्वी प्राची ने कहा, ‘‘मैं देश की बेटी हूं। मैं पीछे नहीं हटूंगी। मुझ पर माफी मांगने के लिए दबाव डाला जा रहा था। उन्होंने (समिति के सदस्यों ने) मुझे चिल्लाकर चुप कराना चाहा। मैंने कहा कि मुझे बोलने का अधिकार है।’’

सूत्रों ने बताया कि बैठक में समिति के अध्यक्ष ने उनसे कई बार माफी मांगने को कहा। किन्तु वह हर बार ‘‘सशर्त माफी’’ मांगने की बात करती रहीं, जबकि सदस्य चाहते थे कि वह बिना शर्त माफी मांगें। सूत्रों ने बताया कि साध्वी प्राची अपने वकील के साथ बैठक में आई थीं। यहां उन्होंने कहा कि वह एक संस्था के रूप में संसद का अपमान नहीं कर रही हैं। किन्तु वह अपनी इस टिप्पणी पर कायम रही कि ‘संसद में कुछ आतंकवादी हैं’।

सदन के नियम 203 के तहत यह मामला समिति के पास पिछले साल अक्तूबर में भेजा गया था। विपक्ष के नेताओं गुलाम नबी आजाद, माकपा के सीताराम येचुरी एवं टीआरएस के के केशव राव सहित 20 सदस्यों ने विहिप नेता के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस दिया था। इसमें कहा गया था कि उनकी टिप्पणी से संसद की गरिमा एवं सांसदों के विशेषाधिकार का हनन हुआ है।

रूड़की की एक जनसभा को संबोधित करते हुए विहिप नेता ने 1993 के मुंबई बम विस्फोटों के दोषी याकूब मेनन को फांसी दिये जाने का विरोध करने वालों को आड़े हाथ लिया था। उन्होंने कहा था, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारतीय संसद में एक या दो आतंकवादी बैठे हुए हैं। मुझे नहीं लगता कि भारत का इससे बड़ा कोई दुर्भाग्य हो सकता है, क्योंकि वे अदालत के फैसले का अनादर कर रहे हैं। अदालत ने यह साबित किया है कि वह (याकूब मेनन) एक आतंकवादी है।’’ उन्होंने यह बात मेनन की फांसी का विरोध करने वाले सांसदों की ओर परोक्ष तौर पर इशारा करते हुए कही थी।

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