पढ़िए: तीन तलाक पर ये है “नया कोड ऑफ कंडक्ट”

लखनऊ। तीन तलाक के मुद्दे पर आल इंडिया मुस्लिम पेर्सनल लॉ बोर्ड की दो दिवसीय बैठक के बाद सभी सदस्यों की आम सहमति से बिना शरई कारणों के तीन तलाक का इस्तेमाल करने वाले लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने का एलान किया गया। वहीँ तीन तलाक को फिर से परिभाषित करने के लिए नया कोड ऑफ कंडक्ट जारी किया गया है।

बोर्ड की बैठक के बाद मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि तीन तलाक को लेकर लोगों में कुछ गलत फहमियां हैं। इन गलत फ़हमियों को दूर करने के लिए नया कोड ऑफ कंडक्ट जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक का दुरूपयोग करने वालो का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा जिससे इसका दुरूपयोग रोका जा सके।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में लिए गए फैसले :

1. मुसलमान मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर पूरी तरह से अमल करके उसकी हिफाज को सुनिश्चित करेगा।

2. बाबरी मस्जिद के सिलसिले में बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही स्वीकार करेगा।

3. इस्लामी शरिअत में निकाह के जरिए से एक बार जो रिश्ता कायम हो जाए, वह हमेशा कायम लेकिन अगर मियां—बीवी के बीच विवाद हो जाए तो इस संबंध में बोर्ड की तरफ से एक कोर्ड आॅफ कंडक्ट जारी किया जा रहा है, उसी पर अमल किया जाए।

4. बोर्ड तमाम उलमा और मस्जिदों के इमामों से अपील करता है कि इस कोर्ड आॅफ कंडक्ट को खुले तौर से पढ़कर नमाजियों को जरूर सुनाएं और इसके अमल पर जोर दें।

5. मुसलमान शादी में फिजूल खर्जी से बचें और उस पैसे को गरीब की शिक्षा पर खर्च करें।

6. मुसलमान अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दें।

7. जिन महिलाओं के साथ तलाक के बेजा प्रयोग के माध्यम से अन्याय हुआ है, बोर्ड उनकी सहायता के लिए हमेशा से तैयार है।

8. बोर्ड तमाम मुस्लिम संगठनों से अपील करता है कि वो मुस्लिम महिलाओं को उनके शरई हकूक दिलाने के लिए और तलाक दी हुई औरतों, बेवाओं और बेसहारा महिलाओं को हर संभव मदद के लिए तैयार रहें।

9. मां—बाप निकाह में अपनी बेटियों को दहेज देने की जगह जायदाद में उनको उनका हिस्सा दें।

10. मुस्लिम पर्सनल लॉ से संबंधित मामलात को मुसलमान दारुल कजा में ही हल कराएं।

11. बोर्ड मुस्लिम वुमेन विंग और हेल्पलाइन को अधिक बढ़ावा देगा।

12. सोशल मीडिया का अधिक से अधिक प्रयोग कर बोर्ड अपनी बातों को लोगों तक अच्छे ढंग से पहुंचाएगा. साथ ही इस्लाम और शरिअत से संबंधित भ्रमों को दूर करने का हर संभव प्रयास करेगा।

13. बोर्ड ने मुसलमानों से ये भी अपील की है कि समाज सेवा के कामों को अधिक से अधिक बढ़ावा दें।

14. जो लोग बिना किसी शरई वजह से एक साथ तीन तलाक देंगे, उनका शरई बॉयकॉट किया जाए।

किन हालत में हो सकता है तलाक :

1. अगर पति व पत्नी में विरोधाभास उत्पन्न हो जाए तो पहले वह खुद उन विरोधाभास को समाप्त करने की कोशिश करें. इन दोनों को यह बात सामने रखना चाहिए कि हर व्यक्ति में कुछ कमजोरियां होती हैं और बहुत सी अच्छाईयां भी होती हैं। अत: एक-दूसरे की गलतियों को नजरअंदाज करने की कोशिश करनी चाहिए।

2. अगर इस तरह से बात न बने तो आरजी यानि अस्थायी तौर पर कता तआल्लुक यानी संबध विच्छेद किया जा सकता है।

3. अगर ये दोनों ही तरीके नाकाम हो जाएं तो दोनों खानदानों के समझदार लोग समझौते की कोशिश करें या दोनों तरफ से एक-एक निर्णायक बनाकर बाहमी विरोधाभास को समाप्त करने का प्रयास किया जाए।

4. अगर इसके बाद भी बात न बने तो बीवी को पाकी की हालत में पति एक तलाक देकर छोड़ दे. यहां तक कि इद्दत के दिन गुजर जाएं. इद्दत के दौरान अगर समझौता हो जाए तो पति संपर्क कर ले और दोनों फिर पति पत्नी की तरह जीवन व्यतीत करें। अगर इद्दत के बीच पति ने संपर्क नहीं किया और समझौता नहीं हुआ तो इद्दत के बाद खुद ही रिश्ता निकाह खत्म हो जाएगा। दोनों नव जीवन शुरू करने के लिए स्वतंत्र और खुद मुख्तार यानी स्वयं उत्तरदायी होंगे। अगर पत्नी इस समय गर्भ धारित होगी तो इद्दत की मुद्दत गभी खत्म होने तक जारी रहेगी। तलाक देने की सूरत में पति को महर और इद्दत अवधि का खर्च देना होगा। और महर बाकी हो तो वह भी फौरन अदा करना होगा।

5. अगर इद्दत के बाद समझौता हो जाए तो आपसी रजामंदी से नए महर के साथ दोनों नए निकाह के माध्यम से रिश्ते को बढ़ा सकते हैं।

6. दूसरी सूरत ये है कि पति पाकी की हालत मे एक तलाक दे फिर दूसरे महीने दूसरी तलाक दे और तीसरे महीने तीसरी तलाक दे। तीसरी तलाक से पहले अगर समझौता हो जाए तो पति संपर्क कर ले और पिछला संबंध निकाह बहाल कर ले।

7. अगर पत्नी पति के साथ रहना नहीं चाहती है तो वह खुला के द्वारा इस रिश्ते को समाप्त कर सकती है।

8. मुस्लिम समाज को चाहिए कि जो शख्स एक साथ तीन तलाक दे उसका समाजी बायकाट करें ताकि ऐसा वाकिआत कम से कम हो।

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TeamDigital