पाकिस्तान के हज़ारो सिंधी हिन्दुओं को भारतीय नागरिकता मिलने की उम्मीद

पाकिस्तान के हज़ारो सिंधी हिन्दुओं को भारतीय नागरिकता मिलने की उम्मीद

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नई दिल्ली । पाकिस्तान से विस्थापित धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार कदम उठा रही है। इस बीच, एक संगठन का दावा है कि पाकिस्तान छोड़ने के बाद मध्य प्रदेश में प्रवास कर रहे करीब 35,000 सिंधी हिंदू भारतीय नागरिकता पाना चाहते हैं।

सिंधी हिंदुओं के संगठन अखिल भारतीय सिंधी समाज की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जेपी मूलचंदानी ने सोमवार को कहा कि हमारे अनुमान के मुताबिक फिलहाल मध्य प्रदेश में पाकिस्तान के करीब 35,000 सिंधी हिंदू शरणार्थी हैं, जो भारत की नागरिकता चाहते हैं। इनमें से करीब 15,000 शरणार्थी इंदौर और भोपाल में हैं। उन्होंने बताया कि सिंधी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता देने का मसला लंबे समय से हल नहीं हो सका है। नतीजतन ये पाकिस्तानी शरणार्थी भारत की स्थायी नागरिकता के अभाव के कारण बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं।

मूलचंदानी ने बताया कि सिंधी हिंदुओं की भारतीय नागरिकता के कुछ आवेदन तो पिछले 15 साल से लंबित हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान से विस्थापित धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने के प्रस्ताव के बारे में केंद्र सरकार ने पिछले दिनों सुझाव आमंत्रित किए थे।

मूलचंदानी ने बताया कि उनके संगठन ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह 31 दिसंबर, 2014 के पहले से भारत में प्रवास कर रहे सिंधी हिंदुओं को उनके दीर्घकालीन वीजा के नवीनीकरण की अनिवार्यता से छूट दे।

केंद्र सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक मध्य प्रदेश में इंदौर और भोपाल के जिलाधिकारियों को यह अधिकार दिया जाएगा कि वे पाकिस्तान के विस्थापित अल्पसंख्यकों को शुरुआत में दो साल की अवधि के लिए भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत कर सकेंगे।

मूलचंदानी ने कहा- हमारी मांग है कि इंदौर और भोपाल के साथ जबलपुर और ग्वालियर के जिलाधिकारियों को भी यह अधिकार दिया जाए। इसके साथ ही प्रदेश में रह रहे सिंधी हिंदुओं की भारतीय नागरिकता के आवेदनों के निपटारे के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति की जाए।

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