जीप से बांधकर घुमाये गए व्यक्ति की आपबीती : मैंने अपनी पूरी जिंदगी में पत्थर नहीं उठाया

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में सेना द्वारा जिस व्यक्ति को अपनी जीप के आगे बांधकर घुमाया गया था उस व्यक्ति का कहना है कि न तो उसने कोई पत्थरबाज़ी की और न ही वह किसी फसाद में शामिल था। वह श्रीनगर में अपने एक रिश्तेदार की मौत की खबर पर उसके घर जा रहा था कि रिश्ते में सेना के जवानो ने उसकी मोटरसाईकिल रोक ली और उसे जीप से बाँध कर 9 गाँवों के इलाको में घुमाया।

इस पूरी घटना में युवक के हाथ में चोट भी आई है। जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इसपर दुख जताया था। पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी यह वीडियो शेयर किया था।

26 वर्षीय फारुख अहमद डार ने कहा कि ‘मैंने कभी भी पत्थर नहीं फेंके, मैंने अपनी पूरी जिंदगी में पत्थर नहीं उठाया, मैं तो शॉल पर कढ़ाई करने का काम करता हूं, साथ ही थोड़ी बहुत कारपेंट्री करता हूं। मुझे बस यही आता है।’ उस घटना के बाद से फारुख बड़ा परेशान है। उसने डर की वजह से शिकायत भी नहीं की। शिकायत ना करने की बात का जिक्र करते हुए फारुख ने कहा, ‘गरीब लोग हैं, क्या करेंगे शिकायत।’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक फारुख ने कहा कि वह अपनी 75 साल की मां के साथ अकेला रहता है। फारुख की मां को अस्थमा है। उन्होंने फारुख की बात से सहमति जताते हुए कहा, ‘हमें किसी जांच की जरूरत नहीं है, हम गरीब लोग हैं, मैं इसको खोना नहीं चाहती, मेरे बुढ़ापे का यह अकेला सहारा है।’

फारुख ने बताया कि वह वीडियो 9 अप्रैल का है। फारुख के मुताबिक, उस दिन आर्मी ने उसको सुबह 11 बजे पकड़ा और तकरीबन चार घंटे तक तकरीबन 25 किलोमीटर तक ऐसे ही घुमाया। फारुख ने बताया कि उस दिन वह अपने कुछ साथियों के साथ एक रिश्तेदार के घर जा रहा था जिसकी श्रीनगर में मौत हो गई थी। तब रास्ते में आर्मी ने उसकी मोटरसाइकिल रोक ली और उसको जीप से बांधकर आगे बैठा दिया। फारुख के मुताबिक, आर्मी ने उसको मारा भी था। उसके बाद उसको आसपास के 9 गांवों में घुमाया गया।

फारुख ने बताया कि उसकी छाती पर एक सफेद कागज लगाकर उसपर फारुख का नाम लिखा गया था। साथ ही जीप में बैठे आर्मीवाले चिल्ला रहे थे कि अब अपने किसी पर पत्थर फेंक कर दिखाओ। फारुख के मुताबिक, उसकी ऐसी हालत देखकर कोई पास आने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था और सब वहां से भाग रहे थे।

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