कहाँ से आया ‘भारत माता की जय’ का नारा और क्या कहता है कानून

कहाँ से आया ‘भारत माता की जय’ का नारा और क्या कहता है कानून

नई दिल्ली । जेएनयू के बाद देश भक्ति को लेकर छिड़े विवाद ने एक नया मुद्दा पैदा कर दिया है । देश में एक विशेष सोच के लोग भारत माता की जय बोलने को लेकर राजनीति की दुकान चला हैं । इस विशेष सोच के लोगों का मानना है कि जो भारत माता की जय बोले सिर्फ वही देशभक्त है जबकि देश का संविधान और कानून ऐसा नहीं कहता ।

कानून के मुताबिक भारत माता की जय बोलना हमारे संस्कारों में आ सकता है लेकिन इस वाक्य को न बोलना किसी कानून का उलंघन नहीं है। यह सिर्फ देश के सम्मान से जुड़ा एक और नारा है लेकिन देश के सम्मान को दर्शाने के लिए ज़रूरी नहीं कि भारत माता की जय ही कहा जाए । इसके लिए भारत ज़िंदाबाद, जयहिन्द या इंग्लिश में लौंग लिव इंडिया भी कहा जा सकता है ।

कहाँ से आया भारत माता की जय का नारा

विकीपीडिया पर दी गई जानकारी के अनुसार भारत माता की जय भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दौरान सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाला नारा था। भारत भूमि को जीवन का पालन करने वाली माता के रूप में रूपायित कर उसकी मुक्ति के लिए की गई कोशिशों में उसकी संतानों ने इस नारे का बार बार प्रयोग किया।

भारत माता की वंदना करने वाली यह उक्ति हर द्घोष के साथ स्वाधीनता संग्राम के सिपाहियों में नए उत्साह का संचार करती थी। आज भी इस नारे का प्रयोग राष्ट्रप्रेम या राष्ट्र निर्माण से जुड़े अवसरों, कार्यक्रमों एवं आंदोलनों में किया जाता है।

भारत माता की जय से जुड़े चर्चित बयान
-नई पीढ़ी को भारत माता की जय बोलने को भी कहना पड़ता है: मोहन भागवत
-‘भारत माता की जय’ कहने भर से तय हो रहा है राष्ट्रवाद: शशि थरूर
-भारत माता की जय नहीं बोलूंगा, मेरा मन: असदुद्दीन ओवैसी
-भारत माता की जय बोलना मेरा अधिकार: जावेद अख्तर
-सविंधान को बचाना ही राष्ट्रवाद है: कन्हैया कुमार
-मुझे ‘भारत माता की जय’ कहने में दिक्कत नहीं, पर यह देशभक्ति का प्रमाण नहीं : उमर अब्दुल्ला
-इस देश में रहना है तो भारत माता की जय कहना होगा : देवेन्द्र फडणवीस मुख्यमंत्री महाराष्ट्र
– कानून में यकीन रखते हैं नहीं तो हम अनगिनत सिर गिरा सकते हैं : बाबा रामदेव

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