विपक्ष का आरोप: नाकामी छिपाने के लिए बीजेपी ने रूपाणी को बनाया बलि का बकरा

अहमदाबाद। गुजरात में मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के इस्तीफे को लेकर विपक्ष ने एकसाथ बीजेपी पर हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश सरकार की नाकामियां छिपाने के लिए बीजेपी ने विजय रुपाणी को बलि का बकरा बनाया है।

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि बीजेपी सर्कस की तरह राज्यों के मुख्यमंत्री बदल रही है। क्या जनता को गुजरात में भी इस तरह की सर्कस वाली सरकार चाहिए?

वहीँ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि गुजरात में बिगड़ती कानून व्यवस्था को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी के पास नेतृत्व बदलने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा कि सरकार का ‘‘रिमोट कंट्रोल’’ दिल्ली में और प्रदेश भाजपा प्रमुख सी. आर. पाटिल के हाथों में रहता है लेकिन दोनों ‘‘रिमोट कंट्रोल ऑपरेटर’’ नाकाम रहे हैं।

कांग्रेस के नेता हार्दिक पटेल ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री पद से रूपाणी के इस्तीफे से साफ हो गया है कि बीजेपी सरकार चलाने में नाकाम रही है। असली बदलाव अगले साल राज्य विधानसभा चुनाव के बाद आएगा, जब जनता BJP को सत्ता से बाहर कर देगी।’’

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गौरतलब है कि गुजरात में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव से पहले राज्य में मुख्यमंत्री पद से विजय रुपाणी को हटाये जाने का साफ़ संदेश यही है कि पार्टी अगले चुनाव में विजय रुपाणी को पार्टी का चेहरा बनाकर पेश नहीं करना चाहती।

हालांकि विजय रूपाणी के इस्तीफे को लेकर कई बातें सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है कि कोरोना काल में राज्य सरकार के मैनेजमेंट से पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह नाखुश थे। वहीँ यह भी कहा जा रहा है कि राज्य में उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के बीच पिछले कुछ समय से शीत युद्ध चल रहा था और दोनों के बीच बढ़ती खाई के कारण प्रदेश सरकार के कामकाज पर असर पड़ रहा था।

सूत्रों की माने तो उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को हटाए जाने की मांग करते हुए पार्टी से बगावत की धमकी दी थी और यदि ऐसा होता तो नितिन पटेल कई विधायकों को लेकर बीजेपी से अलग जा सकते थे और राज्य में बीजेपी की किरकिरी होना तय था। इसे भांपते हुए आनन फानन में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को हटाए जाने का फैसला लिया गया।

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