दो चैनलों पर देशद्रोही की कार्रवाही पर सरकार को झटका, देशद्रोह पर सुप्रीमकोर्ट ने की ये टिप्पणी

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के दो तेलगु चैनलों पर देशद्रोह का मामला दर्ज किये जाने की सरकार की कार्यवाही को सुप्रीमकोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीमकोर्ट ने दोनों तेलगु चैनलों के खिलाफ कार्रवाही पर रोक लगाते हुए कहा कि समय आ गया है जब हम देशद्रोह की सीमा को परिभाषित करें।

इतना ही नहीं सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि सरकार को आंध्र प्रदेश के न्यूज़ चैनलों टीवी-5 तथा एबीएन आंध्र ज्योति के खिलाफ देशद्रोह की कार्रवाही नहीं करनी चाहिए थी। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘आंध्र प्रदेश सरकार चैनलों के खिलाफ देशद्रोह के मामले दर्ज कर उनको दबा रही है। यह समय है कि अदालत देशद्रोह को परिभाषित करे।’

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि उस एफआईआर से संबंधित समाचार चैनलों के कर्मचारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। पीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों – 124ए (राजद्रोह) और 153 (विभिन्न वर्गों के बीच कटुता को बढ़ावा देना) की व्याख्या की जरूरत है, खासकर प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर।’

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गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश के दो न्यूज़ चैनलों टीवी-5 तथा एबीएन आंध्र ज्योति चैनलों के खिलाफ राजद्रोह सहित विभिन्न अपराधों के लिए आरोप लगाए गए हैं। उक्त समाचार चैनलों ने आंध्र में सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के बागी सांसद के रघु राम कृष्ण राजू के ‘आपत्तिजनक’ भाषण का प्रसारण किया था।  इसलिए राज्य सरकार ने उन चैनलों के खिलाफ देशद्रोह का आरोप लगाया था। दोनों चैनलों ने इस कार्रवाही के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

आज इस मामले में सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार की कार्रवाही से असहमति जताते हुए कार्रवाही नहीं करने के निर्देश दिए। देश की सर्वोच्च अदालत ने साफतौर पर कहा कि यह समय है कि अदालत देशद्रोह को परिभाषित करे।

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