संघ के आंतरिक सर्वे में दिखी BJPकी हार तो मुसलमानो को साधने के लिए आया भागवत का बयान!

नई दिल्ली। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा कल दिए गए बयान पर सियासी घमासान के बीच अब खबरें आ रही हैं कि मोहन भागवत द्वारा मॉब लिंचिंग और मुसलमानो को लेकर दिए गए बयान के पीछे संघ का वह आंतरिक सर्वे है जो उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर किया गया है।

सूत्रों की माने तो उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर संघ ने मई महीने में अपना आंतरिक सर्वे कराया था। इस सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी के रिश्तो में दरार पैदा होने की बात कई दिनों तक मीडिया की हैडलाइन बनी।

सूत्रों के मुताबिक, संघ के आंतरिक सर्वे में सामने आया है कि यदि विपक्ष एकजुट न भी हो तो भी भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में 100 सीटों तक नहीं पहुंच रही। सूत्रों ने कहा कि संघ ने अपने आंतरिक सर्वे की रिपोर्ट बीजेपी आलाकमान को दी थी जिसमे बाद बीजेपी की चुनाव मामलो की समिति की दिल्ली में बैठक हुई थी। इस बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के अलावा पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे।

सूत्रों ने दावा किया कि संघ के आंतरिक सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद ही बीजेपी अध्यक्ष के कहने पर प्रदेश प्रभारी को लखनऊ भेजा गया था। जिन्होंने तीन दिनों तक लखनऊ प्रवास के दौरान बीजेपी के छोटे बड़े नेताओं के अलावा राज्य सरकार के मंत्रियों और विधायकों से भी चर्चा की थी।

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वहीँ सूत्रों का यह भी कहना है कि रविवार को एक किताब के विमोचन समारोह में संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा दिया गया बयान अचानक उनके दिल से निकले हुए शब्द नहीं हैं बल्कि उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मुसलमानो को साधने की कवायद के तहत दिया गया एक बयान है।

मोहन भागवत ने मुसलमानो और मॉब लिंचिंग को लेकर जो कहा वह बीजेपी और संघ के हार्डकोर हिंदुत्व से मेल नहीं खाता। जबकि संघ प्रमुख मोहन भागवत यह भी जानते होंगे कि उनके बयान में कई तरह के विरोधावास है।

खुद बीजेपी नेता ही मुसलमानो के डीएनए को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और उन्हें पाकिस्तान जाने की सलाह देते रहे हैं। इतना ही नहीं देश के कई राज्यों में हुई मॉब लिंचिंग की घटना में शामिल लोग प्रत्यक्ष रूप से विहिप, बजरंग दल, हिन्दू युवा वाहिनी और बीजेपी के यूथ विंग से जुड़े हुए पाए गए हैं।

सूत्रों ने कहा कि संघ के आंतरिक सर्वे रिपोर्ट में बजी खतरे की घंटी के बाद अब मुसलमानो को साधने की कोशिश की जायेगी। यह इसलिए भी है क्यों कि उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन, बेरोज़गारी और महंगाई के आगे बीजेपी का कटटर हिंदुत्व चुनाव में काम नहीं आता दिखाई दे रहा।

सूत्रों ने कहा कि संघ की कोशिश होगी कि किसी तरह एक दो प्रतिशत मुसलमानो के दिलो में जगह बनाकर उनके वोट हासिल किये जाएँ। जिससे चुनाव में बीजेपी कम से कम उस स्थिति तक पहुंच जाए, जहां पहुंचकर वह जोड़तोड़ कर सरकार बनाने की कोशिश कर सके।

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क्या कहा था मोहन भागवत ने:

आरएसएस प्रमुख ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा था, “हम समान पूर्वजों के वंशज हैं और ये विज्ञान से भी सिद्ध हो चुका है। 40 हजार साल से एक साथ हैं, DNA समान है।”

मोहन भागवत ने कहा है कि अगर कोई हिंदू कहता है कि यहां कोई मुसलमान नहीं रहना चाहिए, तो वह व्यक्ति हिंदू नहीं है और यह मैंने पहली बार नहीं कहा है, यह चलते आया है।

भागवत ने कहा कि आज मुझे संघ के शीर्ष पर रखा गया है तो मै बोलता हूं पर यह शुरू से कहा गया है तब संघ छोटा था तो उसकी बात सुनी नहीं गई। हम सबके पूर्वज एक समान हैं, स्वार्थ अलग अलग होंगे पर समाज एक है।

भागवत ने कहा कि वोट की राजनीति में हम नहीं पड़ते। राष्ट्र में क्या होना चाहिए, इस बारे में हमारे कुछ विचार हैं। अब एक ताकत बनी है तो वो ठीक हो जाए, इतनी ताकत हम चुनाव में भी लगाते हैं। हम राष्ट्रहित के पक्षधर हैं।

इतना ही नहीं संघ प्रमुख ने मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर कहा कि इसमें शामिल लोग हिंदुत्व के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि गाय एक पवित्र जानवर है लेकिन जो लोग दूसरों को मार रहे हैं वे हिंदुत्व के खिलाफ जा रहे हैं। कानून को बिना किसी पक्षपात के उनके खिलाफ अपना काम करना चाहिए।

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