कृषि कानून रद्द होने और एमएसपी पर कानून बनने तक एक इंच पीछे नहीं हटेगा किसान : टिकैत

रेवाड़ी। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आज एक बार फिर सरकार से दो टूंक शब्दों में कहा कि जब तक एमएसपी पर कानून नहीं बता और तीनो नए कृषि कानून रद्द नहीं होते तब तक किसान यहीं रहेंगे और आंदोलन जारी रहेगा।

हरियाणा के रेवाड़ी में किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि “जब तक सरकार MSP पर क़ानून नहीं बनाती और किसानों के सभी मसलों पर बातचीत नहीं करेगी तब तक किसान यहां से नहीं जाएगा, वह यहां पर डटा रहेगा। कोरोना का रास्ता अस्पताल जाता है और किसान का रास्ता पार्लियामेंट जाता है, दोनों के रास्ते अलग है।”

गौरतलब है कि आगामी 26 मार्च को किसान आंदोलन को 6 महीने पूरे हो जाएंगे। तीन नए कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग को लेकर शुरू हुआ किसान आंदोलन कोरोना महामारी के बीच भी आम दिनों की तरह ही चल रहा है और दिल्ली से सटे पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर किसानो का आना जाना जारी है।

कोरोना माहमारी को लेकर राकेश टिकैत पहले ही कह चुके हैं कि सरकार आंदोलन स्थल पर किसानो को वैक्सीन लगाने के इंतजाम करे, इसके लिए किसान सरकार के साथ पूरा सहयोग करने को तैयार हैं।

ये भी पढ़ें:  अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री रहेंगे या नहीं? 1-2 दिन में फैसला लेंगी सोनिया गांधी

राकेश टिकैत ने आज भी अपने बयान को एक बार फिर दोहराया और कहा कि आंदोलन स्थलों पर किसान कोरोना गाइडलाइन का पूरा पालन कर रहे हैं। सरकार किसानो को आंदोलन स्थल पर ही वैक्सीन लगाए। इसके लिए किसान पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

वहीँ राकेश टिकैत ने सरकार के साथ फिर से बातचीत शुरू होने के सवाल पर कहा कि किसान कहीं नहीं जा रहे, सरकार को बात करनी है तो वह तारीख और समय तय करे। किसानो ने कभी बातचीत के इंकार नहीं किया है।

इससे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने अपने फेसबुक पेज पर किये गए पोस्ट में सरकार के डीएपी पर सब्सिडी बढ़ाने और पुरानी कीमत को बरकरार रखने के फैसले पर पर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा कि सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है और इससे किसानों पर बोझ कम होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम उर्वरकों की बढ़ी कीमतों के विरोध में किसान संगठनों के लगातार तेज हो रहे विरोध से पैदा दबाव का नतीजा है। इस फैसले को हम सकारात्मक कदम मानते हैं।

उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि सरकार जल्दी की तीन नये कृषि कानूनों को लेकर इसी तरह की सकारात्मक सोच का परिचय देते हुए इन कानूनों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी जामा पहनाने का फैसला भी लेगी।

अपनी राय कमेंट बॉक्स में दें
सत्य को ज़िंदा रखने की इस मुहिम में आपका सहयोग बेहद ज़रूरी है। आपसे मिली सहयोग राशि हमारे लिए संजीवनी का कार्य करेगी और हमे इस मार्ग पर निरंतर चलने के लिए प्रेरित करेगी। याद रखिये ! सत्य विचलित हो सकता है पराजित नहीं।
ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें