राहुल के बयान से गहलोत की दावेदारी में फंसा पेच, अब दिग्विजय-कमलनाथ पर टिकी हैं नज़रें

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर जहां पार्टी के अंदर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। वहीँ अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का मन बना रहे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की दावेदारी में पेंच फंस गया है।

कांग्रेस के संगठन चुनाव को लेकर केरल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष का पद सिर्फ एक संगठनात्मक पद नहीं है, यह एक वैचारिक पद और एक विश्वास प्रणाली है।

राहुल गांधी ने कहा कि हमने उदयपुर चिंतन शिविर में एक व्यक्ति एक पद को लेकर जो फैसला किया था, हम उम्मीद करते हैं कि वह प्रतिबद्धता बनाए रखी जाएगी। राहुल गांधी के इस बयान से अशोक गहलोत की दावेदारी पर संकट खड़ा हो गया है।

दरअसल, कल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके दस जनपथ स्थित आवास पर मुलाकात की थी। सूत्रों की माने तो इस मुलाकात के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर भी चर्चा हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री गहलोत ने राजस्थान का मुख्यमंत्री रहते हुए कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार संभालने की इच्छा जताई थी।

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इतना ही नहीं अशोक गहलोत ने मीडिया में भी इसी तरह का बयान दिया और कहा कि वे कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़कर अध्यक्ष बनेगे और वे चुनाव जीत कर ही राजस्थान के मुख्यमंत्री बने हैं।

वहीँ राहुल गांधी द्वारा आज प्रेस कांफ्रेंस में उदयपुर चिंतन शिविर में तय किये गए एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत का उल्लेख किये जाने के बाद फिलहाल यह तय माना जा रहा है कि अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री या पार्टी अध्यक्ष में से एक चीज़ चुननी पड़ेगी।

दिग्विजय सिंह और कमलनाथ पर भी नज़रें:

इस बीच कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अशोक गहलोत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री का पद नहीं छोड़ेंगे। इसकी अहम् वजह सचिन पायलट हैं। गहलोत कभी नहीं चाहेंगे कि उनके सामने ही सचिन पायलट के राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ़ हो जाए।

इधर सूत्रों का कहना है कि गांधी परिवार के वफादार दिग्विजय सिंह और कमलनाथ भी अब दावेदारों की लिस्ट में हैं। देखना है कि इन दो नेताओं में गांधी परिवार किसको प्राथमिकता देता है।

जहां तक दिग्विजय सिंह का सवाल है, उनके पास लंबा राजनीतिक अनुभव है। वे मुख्यमंत्री के अलावा केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के प्रभारी के तौर पर कांग्रेस पार्टी में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। दिग्विजय सिंह हिंदी भाषी है और संघ-भाजपा के खिलाफ खुलकर बोलते हैं।

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वहीँ दूसरी तरफ कमलनाथ के पास भी राजनीति का लंबा अनुभव है। वे भी केंद्र में मंत्री होने के अलावा राज्यों में पार्टी के प्रभारी के तौर पर अनुभव रखते हैं। कमलनाथ की भी हिंदी पर अच्छी पकड़ है लेकिन वे मध्य प्रदेश में अपनी सरकार नहीं बचा सके और अपने विधायकों को बीजेपी के खेमे में जाने से नहीं रोक सके।

सूत्रों की माने तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा से बीच में ही दिल्ली आ रहे हैं। हालांकि अभी सूत्रों ने यह नहीं बताया कि राहुल गांधी आज देर रात दिल्ली पहुंच रहे हैं या वे अगले एक दो दिन में दिल्ली आएंगे।

दूसरी तरफ कांग्रेस में संगठन चुनाव के लिए आज अधिसूचना जारी हो गई है। नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 24 से 30 सितंबर तक चलेगी। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि आठ अक्टूबर है। एक से अधिक उम्मीदवार होने पर 17 अक्टूबर को मतदान होगा और नतीजे 19 अक्टूबर को घोषित किये जाएंगे।

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