हिल रही येदियुरप्पा की कुर्सी, भ्रष्टाचार मामले में कोर्ट ने दिए जांच तेज करने के आदेश

हिल रही येदियुरप्पा की कुर्सी, भ्रष्टाचार मामले में कोर्ट ने दिए जांच तेज करने के आदेश

बेंगलुरु। कर्नाटक में जहां बीजेपी के अंदर ही मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के विरोध में आवाज़ें उठने लगी हैं वहीँ अब भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में आज कोर्ट ने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को बड़ा झटका देते हुए जांच में तेजी लाने के आदेश दिए हैं।

जन प्रतिनिधियों से संबद्ध एक विशेष अदालत ने बेंगलुरु में बेशकीमती भूमि को गैर- अधिसूचित करने के 15 साल पुराने एक मामले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के विरूद्ध जांच बंद करने की अनुमति मांगने वाली लोकायुक्त पुलिस की ‘बी-रिपोर्ट’ शनिवार को खारिज कर दी।

न्यायाधीश श्रीधर गोपालकृष्ण भट ने अपने आदेश में कहा, ‘‘अपराध दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 173 (3) के तहत सौंपी गई ‘बी रिपोर्ट’ खारिज की जाती है। सीआरपीसी की धारा 153 (3) के तहत, कर्नाटक लोकायुक्त की पुलिस शाखा, बेंगलुरु से संबद्ध पुलिस उपाधीक्षक को इस आदेश में की गई टिप्पणी के आलोक में तेजी से मामले की आगे जांच करने और अंतिम/अतिरिक्त अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है।’’

अदालत ने जांच अधिकारी को जांच में देरी के सिलसिले में कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा की गयी टिप्पणी को भी ध्यान में रखने के बारे याद दिलाया. यह मामला बेल्लंदूर और दीवारबीसनहल्ली में बेशकीमती भूमि को गैर अधिसूचित करने से जुड़ा है, इस भूमि का संबंध वार्थुर-व्हाईटफील्ड आईटी कॉरिडोर से था। यह भूमि 2000-01 में आईटी पार्क के लिए अधिग्रहित की गई थी। हालांकि, 2006-07 में एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे येदियुरप्पा ने इस जमीन को गैर अधिसूचित कर दिया।

गौरतलब है कि वासुदेव रेड्डी नामक एक व्यक्ति द्वारा लोकायुक्त अदालत में दायर की गई शिकायत में भूमि को गैर अधिसूचित करने में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया था। इस मामले में लोकायुक्त अदालत ने लोकायुक्त पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था तथा बाद में भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत 21 फरवरी, 2015 को एक मामला दर्ज किया गया था।

दिसंबर, 2020 में येदियुरप्पा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके इस मामले को खारिज करने की मांग की थी। येदियुरप्पा ने दलील दी थी कि हाईकोर्ट ने नौ अक्टूबर, 2015 को तत्कालीन उद्योग मंत्री और कांग्रेस नेता आर वी देशपांडे के विरूद्ध इसी तरह की प्राथमिकी खारिज कर दी थी, इसलिए उसके आधार पर उनके विरूद्ध भी जांच अवैध है, लेकिन उच्च न्यायालय ने उनकी दलील खारिज कर दी और पुलिस को जांच तेज करने का निर्देश दिया। लोकायुक्त पुलिस ने विशेष अदालत में ‘बी रिपोर्ट’ दाखिल कर जांच बंद करने की अनुमति मांगी थी, जिसे रेड्डी ने चुनौती दी थी।

TeamDigital