राफेल सौदे की जांच करेगा फ्रांस, कांग्रेस की मांग ‘भारत में जेपीसी करे जांच’

नई दिल्ली। फ्रांस सरकार, भारत के साथ करीब 59 हजार करोड़ रुपये के राफेल सौदे में कथित भ्रष्टाचार की न्यायिक जांच को तैयार हो गई है। फ्रांसीसी मीडिया जर्नल मीडियापार्ट की रिपोर्ट के मुतबिक राफेल सौदे की जांच के लिए एक फ्रांसीसी जज को भी नियुक्त कर लिया गया है।

राफेल सौदे को लेकर फ़्रांस में जांच शुरू होने की खबरों पर शनिवार को कांग्रेस ने एक बार फिर राफेल की खरीद में भ्रष्‍टाचार का आरोप लगाते हुए भारत में इस सौदे की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराये जाने की मांग की है।

राफेल डील पर शनिवार को केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कांग्रेस महासचिव और प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि यह प्रथम दृष्टि में भ्रष्टाचार का आरोप है।

सुरजेवाला ने कहा कि फ्रांस में प्रथम दृष्या भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ गए हैं तो सरकार जेपीसी की जांच क्यों नहीं करवाती। यदि दाल में कुछ काला नहीं है तो फिर जांच से सरकार को डर किस बात का डर है। यदि दाल में कुछ काला है कि तो अलग बात है।

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सुरजेवाला ने कहा कि यह राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ा मामला है, इसलिए जेपीसी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा की पारदर्रिशता, जवाबदेही, भ्रष्टचार मुक्त शासन देना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

सुरजेवाला ने कहा कि अब सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी जी सामने आकर राफेल घोटाले की जेपीसी जांच कराएंगे? उन्होंने कहा कि अब भष्टाचार की परतें खुल चुकी हैं। प्रथम दृष्टि से राफेल घोटाला सामने है। राफेल में घोटाला सामने है। सरकारी खजाने को चूना लगाना सामने है। देशहित का विरोध करना भी सामने है।

सुरजेवाला ने कहा कि 25 मार्च 2015 को दसाल्ट के सीईओ बैंगलौर आते हैं और भारतीय वायुसेना और एचएएल के प्रमुख की मौजूदगी में दसाल्ट और एचएएल के समझौते की पुष्टि करते हैं, लेकिन 24 घंटे में ही दसाल्ट एविएशन रिलायंस से अपना नया एग्रीमेंट का साइन कर लेती है।

फ्रांस ने भारत के साथ वर्ष 2016 में हुए अरबों डॉलर के विवादित राफेल फाइटर जेट डील की जांच के आदेश दिए हैं। देश के नैशनल फाइनेंशियल प्रॉसिक्यूटर्स ऑफिस ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। इसके लिए एक जज की नियुक्ति के आदेश दिए गए हैं। करीब 9.3 अरब डॉलर के इस समझौते के तहत भारत को 36 फाइटर जेट दिया जाना है।

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