पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने अब्बास सिद्दीकी की पार्टी से नाता तोड़ा
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-वामपंथी गठबंधन में शामिल अब्बास सिद्द्की की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट से नाता तोड़ लिया है। इस गठबंधन में इंडियन सेक्युलर फ्रंट को शामिल किये जाने को लेकर कई कांग्रेस नेताओं ने भी सवाल उठाये थे।
पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने साफ कहा कि भविष्य में अब्बास सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के साथ वह कोई संबंध नहीं रखना चाहते हैं। चुनाव में कांग्रेस की पराजय को लेकर चौधरी ने कहा कि हार के कारणों को ढ़ढ़ने के लिए कांग्रेस ने एक कमेटी गठित करने का निर्णय किया है।
अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “उनकी पार्टी कभी ISF के साथ गठबंधन करने नहीं गई थी। मैंने वाममोर्चा ऐसा नहीं करने को कहा था, लेकिन उन्होंने कहा कि वे वादा कर चुके हैं। चूंकि कांग्रेस और वाममोरचा के बीच पहले से साझेदारी थी, इसलिए संयुक्त मोर्चा का गठन हुआ। मोर्चे का असफल होना तय था क्योंकि बंगाल के लोगों ने गठबंधन को स्वीकार करने से इंकार कर दिया।”
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने इतिहास का सबसे ख़राब प्रदर्शन किया है। राज्य की 296 सीटों में से कांग्रेस-वामपंथी गठबंधन द्वारा एक भी सीट नहीं जीतने के साथ-साथ अधिकतर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है।
सोमवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पांच राज्यों में पार्टी की हार के लिए प्रदेश अध्यक्षों और प्रदेश प्रभारियों से पराजय के कारण पूछे गए थे। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा था कि विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार से हमे सबक लेकर भविष्य के लिए तैयार होना होगा।
सोनिया गांधी ने कहा कि हम किन कारणों से हारे इस पर विस्तृत जानकारी रखी जानी चाहिए और अब हमे आगे क्या करने की ज़रूरत है, उसके लिए रणनीति तैयार की जानी चाहिए।
