सरकार और ट्विटर टकराव पर शिवसेना का वार: ट्विटर कब्ज़े में नहीं आया तो बोझ लगने लगा

मुंबई। शिवसेना ने केंद्र सरकार और ट्विटर के बीच पैदा हुए टकराव को लेकर अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में कड़ी टिप्पणी की है। समाना के संपादकीय में कहा गया है कि सोशल मीडिया में बीते कुछ वर्षों में कीचड़ उछालने, चरित्र हनन की मुहिम चलाई जा रही है। इसका निर्माण, निर्देशन, रंगमंच, कथा-पटकथा सब कुछ भाजपा के ही हाथ में था। फेसबुक ट्विटर, व्हाट्सएप व अन्य माध्यमों का भरपूर इस्तेमाल करने की प्रथा अन्य राजनीतिक दल जानते ही नहीं थे, उस समय (2014 में) भाजपा ने इस कार्य में निपुणता हासिल कर ली थी।

शिवसेना ने कहा है कि मोदी सरकार और भाजपा के राजनीतिक संघर्ष अथवा अभियान की आत्मा ट्विटर था, लेकिन, अब उनके लिए यह बोझ बन गया है। मामला इतना बढ़ गया है कि मोदी सरकार इस मुकाम तक पहुंच गयी हे कि इसे दूर हटाना है या नहीं।

संपादकीय में कहा गया कि ट्विटर जैसे माध्यमों को छोड़ कर पूरे देश की मीडिया मोदी सरकार के नियंत्रण में है। शिवसेना ने आरोप लगाया है कि साल 2014 के चुनाव प्रचार में सोशल मीडिया का ‘मूर्खतापूर्ण’ और ‘चरित्र हनन’ के लिए भरपूर उपयोग किया था।

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पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया पर चरित्र हनन का अभियान चलाया जा रहा है। साल 2014 में भाजपा को इसमें महारत हासिल थी। उसके अलावा अन्य राजनीतिक दल नहीं जानते थे कि इसका भरपूर उपयोग कैसे किया जाये। उस समय तक भाजपा जमीन पर कम और सोशल मीडिया में ज्यादा सक्रिय थी।

‘सामना’ के संपादकीय में सवाल उठाते हुए कहा गया है कि ट्विटर पर राहुल गांधी के लिए आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किस नियम के तहत किया गया? डॉ मनमोहन सिंह जैसे नेता के लिए प्रयोग में लाये गये विशेषण किन नियमों के तहत थे? उद्धव ठाकरे, ममता बनर्जी, शरद पवार, प्रियंका गांधी, मुलायम सिंह जैसे विपक्षी नेताओं के खिलाफ भी चरित्र हनन का अभियान चलाया गया था।

साथ ही कहा गया है कि अब विपक्ष ने ट्विटर का प्रभावी उपयोग करना सीख लिया है और पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में सत्ताधारी दलों में दहशत पैदा कर रहा है। पहले ये हमले एकतरफा थे, तो भाजपा नेता खुश थे. लेकिन, जब विपक्ष ने समान हमले करने शुरू कर दिये तो अब भाजपा में दहशत आने लगी।

संपादकीय में सवाल उठाते हुए कहा गया है कि ट्विटर पर राहुल गांधी के लिए आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किस नियम के तहत किया गया? डॉ मनमोहन सिंह जैसे नेता के लिए प्रयोग में लाये गये विशेषण किन नियमों के तहत थे? उद्धव ठाकरे, ममता बनर्जी, शरद पवार, प्रियंका गांधी, मुलायम सिंह जैसे विपक्षी नेताओं के खिलाफ भी चरित्र हनन का अभियान चलाया गया था।

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साथ ही कहा गया है कि अब विपक्ष ने ट्विटर का प्रभावी उपयोग करना सीख लिया है और पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में सत्ताधारी दलों में दहशत पैदा कर रहा है। पहले ये हमले एकतरफा थे, तो भाजपा नेता खुश थे लेकिन, जब विपक्ष ने समान हमले करने शुरू कर दिये तो अब भाजपा में दहशत आने लगी।

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