जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव करेंगे लखीमपुर हिंसा की जांच, 9 दिन पहले ही हुए हैं रिटायर

लखनऊ ब्यूरो। 3 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई घटना की जांच के लिए उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया है।

जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव 9 दिन पहले 29 सितंबर को ही सेवा निवृत हुए हैं। जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव साल 1996 में पीसीएस जे के जरिए न्यायिक अधिकारी बने थे। इसके बाद उन्हें कई बड़े पदभार दिए गए हैं।

जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव पिछले साल वह अडिशनल जज से पर्मानेंट जज के रूप में प्रमोट हुए थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने विकास दुबे से लेकर पूर्व बीएसपी विधायक हाजी अलीम मर्डर केस, लव जिहाद जैसे कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की।

इतना ही नहीं जस्टिस श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट का जज रहते हुए राजनीतिक दलों द्वारा अपराधियों को टिकिट दिए जाने पर भी कड़ी टिप्पणी की थी। 22 सितंबर अपने आखिरी फैसले में उन्होंने चुनाव में गैंगस्टर और अपराधियों को टिकट देने पर चिंता जाहिर की थी।

बिकरू कांड की सुनवाई करते हुए उन्होंने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर राजनीतिक दलों ने यह ट्रेंड बंद नहीं किया तो ऐसे गैंगस्टर और अपराधी भस्मासुर बन जाएंगे और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाएंगे।

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लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में जांच के लिए बनाये गए आयोग को 2 महीने में जांच पूरी करनी है। जांच के लिए आयोग के गठन के लिए अधिसूचना जारी की गई है।

अधिसूचना में कहा गया है कि राज्यपाल की यह राय है कि 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में 8 लोगों की मौत की जांच होना जरुरी है। जिसके लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को एकल सदस्यीय जांच आयोग के रूप में नियुक्त करते हैं।

हालांकि अधिसूचना में जांच का समय बढ़ाने या न बढ़ाये जाने की संभावनाओं का कोई ज़िक्र नहीं है। इसलिए यदि जांच के लिए दो महीने का समय पर्याप्त नहीं होता तो समय बढ़ाने का फैसला उत्तर प्रदेश शासन करेगा।

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