विधानसभा चुनाव में किसान बीजेपी को देंगे वोट की चोट

नई दिल्ली। कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानो ने अगले वर्ष उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि 5 सितंबर को हम एक बड़ी पंचायत करेंगे जिसमें किसान आंदोलन के लिए आगे की रणनीति बनाएंगे…. हम चुनाव नहीं लड़ेंगे। हम वोट की चोट देंगे।

राकेश टिकैत ने कहा कि सितंबर में मुजफ्फरनगर में होने वाली महापंचायत में यूपी के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब के किसान भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार अगर कृषि कानूनों पर बातचीत करना चाहती है, तो हम चर्चा के लिए तैयार हैं। लेकिन, ये बातचीत बिना किसी शर्त के होगी और अगर बातचीत नहीं होती, या बातचीत से कोई सही हल नहीं निकलता तो फिर 22 जुलाई से 200 किसान संसद भवन के पास धरना देंगे।

गौरतलब है कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तौमर ने हाल ही कृषि कानून रद्द करने पर कोई बातचीत नहीं करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वे कृषि कानूनों को रद्द करने के अलावा अन्य प्रस्तावों पर किसानो से बातचीत के लिए तैयार हैं।

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कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर किसान पिछले 7 महीने से अधिक समय से डंटे हुए हैं। संयुक्त किसान मोर्चे का दावा है कि कृषि कानूनों के रद्द होने और एमएसपी के लिए कानून बनने तक किसान आंदोलन जारी रहेगा और किसान दिल्ली की सीमाओं पर डंटे रहेंगे।

अगले वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में किसानो का रुख केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है।

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