4 नवंबर को देशभर में प्रदर्शन करेंगे किसान संगठन

4 नवंबर को देशभर में प्रदर्शन करेंगे किसान संगठन

नई दिल्ली। रीजनल कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) में भारत के शामिल होने पर किसान संगठनों के कड़ी आपत्ति जताते हुए 04 नवंबर को देशभर में प्रदर्शन करने का एलान किया है।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने सरकार को चेताया है कि इस संधि में भारत शामिल होता है तो देश के कृषि क्षेत्र पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।

एआईकेएससीसी ने घोषणा की है कि चार नवंबर को पूरे देश में करीब 250 किसान संगठन जिला और स्थानीय स्तर पर इसके विरोध में प्रदर्शन करेंगे। बता दें कि आरसीईपी पर भारत की तरफ से 04 नवंबर को हस्ताक्षर होने है।

किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने सरकार को याद दिलाया कि देश में किसानो की हालत पहले से ही बहुत ख़राब है। फसल नष्ट होने, सही दाम न मिलने और क़र्ज़ के बोझ से दबे होने के कारण किसानो के आत्महत्या करने की घटनाएं लगातार हो रही है।

किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि किसानो की दुर्दशा को नज़रअंदाज़ कर सरकार किसानों को और बर्बाद करने वाले आरसीईपी पर हस्ताक्षर करने जा रही है। आरसीईपी पर भारत के हस्ताक्षर करने के बाद देश का डेयरी उद्योग पूरी तरह से तबाह हो जायेगा।

किसान संगठनों ने कहा कि इसके विरोध में किसान संगठनों ने चार नवंबर को समझौते की प्रतियां जलाने का निर्णय लिया है। इस के बाद भी अगर केंद्र सरकार ने समझौते पर हस्ताक्षर किए तो, किसान संगठन आंदोलन को मजबूर होंगे।

गुरुवार को दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में एआईकेएससीसी के संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि इस समय छोटे किसानों की आय का एकमात्र साधन दूध उत्पादन ही बचा हुआ है, अत: अगर सरकार ने आरसीईपी समझौता किया तो डेयरी उद्योग पूरी तरह से तबाह हो जायेगा और 80 फीसदी किसान बेरोजगार हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी प्रधानमंत्री से मांग है कि किसानों के हित में आरसीईपी समझौते से डेयरी और कृषि को पूरी तरह से बाहर रखा जाए।

इस अवसर पर एआईकेएससीसी के संयोजक वीएम सिंह, स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता एवं पूर्व लोकसभा सांसद राजू शेट्टी, आल इंडिया किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह तथा जय किसान आंदालेन के राष्ट्रीय संयोजक अविक शाह सहित कई किसान संगठनों के नेता मौजूद थे।

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TeamDigital