चुनाव आयोग ने ममता के प्रचार करने पर लगाई पाबंदी, ममता ने किया पलटवार

कोलकाता। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर 12 अप्रैल की रात 8 बजे से 13 अप्रैल की रात 8 बजे तक किसी भी तरह के प्रचार करने पर प्रतिबंध लगाया है।

चुनाव आयोग ने अपने आदेश में लिखा है कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया था। एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने बालिकाओं और अल्पसंख्यकों के लिए चलायी जा रही योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा था, “मैं हाथ जोड़कर अपने अल्पसंख्यक भाई-बहनों से अनुरोध करती हूं कि उस ‘शैतान’ की बातों में आकर अपने वोट का बंटवारा न करें. उस ‘व्यक्ति’ ने बीजेपी से पैसे लिये हैं।”

आयोग के इस फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी ने धरना देने की घोषणा कर दी है। टीएमसी सुप्रीमो ने कहा है कि 13 अप्रैल को वह कोलकाता में गांधी मूर्ति के पास धरना देंगी।

चुनाव आयोग द्वारा 24 घंटे की पाबंदी के एलान से नाराज़ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दम दम में एक चुनावी सभा में कहा कि मैं चुनाव आयोग से हाथ जोड़कर निवेदन करती हूं कि सिर्फ भाजपा की न सुनें, सभी की सुनें, पक्षपाती न बनें।

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उन्होंने कहा कि मैं वास्तव में दुखी और शर्मिंदा हूं। मैंने ऐसा प्रधानमंत्री नहीं देखा जो बोलते समय सभी सीमाओं को लांघ जाता है। मैंने सभी धर्म के लोगों के लिए काम किया है। मैंने क्या नहीं किया है?

ममता बनर्जी ने बीजेपी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अब एक ही चीज रह गई है, ‘भाजपा हटाओ देश बचाओ’। उन्होंने कांग्रेस और वामपंथियों पर हमला बोलते हुए कहा कि लेफ्ट और कांग्रेस भाजपा के एजेंट हैं।

वहीँ चुनाव आयोग के आदेश पर तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर उसके एजेंट के रूप में काम कर रहा है। पार्टी के प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने इसे लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन बता दिया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने कहा कि इस तरह से ममता बनर्जी को रोका नहीं जा सकेगा।

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