कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्र को दिया झटका, ममता सरकार को सराहा, केंद्र की याचिका ख़ारिज

कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल में हिंसा को लेकर एक पूर्व आईपीएस के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठन करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उठाये गए कदमो की सराहना भी की।

कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने केंद्र की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य ने अच्छा काम किया है। कानून और व्यवस्था राज्य की जिम्मेदारी है। अब नागरिक का अभिभावक राज्य सरकार है। आप अंतिम शब्द हैं, दूसरी ओर, एजी ने कहा कि फिलहाल हिंसा की कोई घटना नहीं हुई है।

याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने कहा कि 7 मई के बाद पश्चिम बंगाल में कोई हिंसा नहीं हुई है, जबकि केंद्र सरकार के वकील ने कोर्ट से मांग कि एक पूर्व आईएएस अधिकारी के तहत एसआईटी का गठन किया जाए।

राज्य सरकार के वकील ने कहा कि मतदान के बाद की अशांति को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने एक उच्च स्तरीय बैठक की है। राज्य ने एक हलफनामे के साथ गृह सचिव को सूचित किया कि हिंसा की घटनाएं हुई हैं, हालांकि, 7 मई के बाद कोई और हिंसा नहीं हुई। ऐसे में एसआईटी के गठन की कोई आवश्यकता नहीं है।

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कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने फैसले में कहा कि राज्य सरकार ने आवश्यक कदम उठाये हैं। चूंकि कानून व्यवस्था का काम राज्य सरकार का है और राज्य सरकार अपनी तरफ से प्रभावी कदम उठाने की बात कह चुकी है। इसलिए यह याचिका ख़ारिज की जाती है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामो के एलान के बाद कुछ इलाको में हिंसा हुई थी। इसकी जांच के लिए केंद्र सरकार ने एक 4 सदस्यीय जांच दल भी पश्चिम बंगाल भेजा था। हालांकि हिंसा की घटनाएं उस समय हुई थीं जब ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ भी ग्रहण नहीं की थी।

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