धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में अमेरिकी आयोग ने भारत को दी सबसे खराब रेटिंग

धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में अमेरिकी आयोग ने भारत को दी सबसे खराब रेटिंग

नई दिल्ली। धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में दुनियाभर के देशो की रेटिंग तय करने वाले एक गैर सरकारी अमेरिकी आयोग ने भारत 2004 के बाद अब तक की सबसे खराब रेटिंग दी है। हालाँकि भारत के विदेश मंत्रालय ने इस रेटिंग को नकारते हुए इसे पक्षपातपूर्ण बताया है।

मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता मामलों से जुड़ी संस्था यूएस कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के मुसलमानो और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ “उत्पीड़न और हिंसा के अभियानों” को अनुमति दी।

आयोग ने सिफारिश की है कि अमेरिकी विदेश विभाग भारत को “विदेश चिंताजनक स्थिति वाला देश” के तौर पर नामित कर दे। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग गिरने के पीछे नागरिकता संशोधिक कानून और अल्पसंख्यक समुदाय खासतौर पर मुस्लिमों के खिलाफ हो रहे भेदभाव पूर्ण बर्ताव को बताया है।

रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मुस्लिम और दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के खिलाफ चलाए गए उत्पीड़न और हिंसा के अभियान ना रोक पाने का भी जिक्र किया गया है।

संस्था की उपाध्यक्ष नदिने माएंज़ा ने मीडिया को इसकी वजह बताते हुए कहा कि अल्पसंख्यको ने धार्मिक स्वतंत्रता का विशेष तौर पर गंभीर उल्लंघन झेला है।

उन्होंने कहा कि सबसे चौंकाने और परेशान करने वाला” भारत का नागरिकता संशोधन अधिनियम को पारित करना था। जो देश में 6 धर्मों के नए लोगों को तेजी से नागरिकता देता है, लेकिन मुसलमानों को बाहर रखता है।

अमेरिकी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में भारत से बेहतर सूडान और उजबेकिस्तान की तारीफ की है। आयोग ने चीन के हालात पर भी चिंता जाहिर की है, जहां मुस्लिम समुदाय के 1.8 मीलियन लोगों को कॉन्सेंट्रेशन केंपों में रखा गया है।

TeamDigital