बकरीद पर भी नहीं खुलेंगी मस्जिदें, गाइडलाइन जारी
नई दिल्ली। बकरीद के पर्व पर भी मस्जिदों में नमाज़ की अनुमति नहीं दी गई है। कोरोना संक्रमण के चलते बकरीद पर भी मुस्लिम समुदाय के लोगों को अपने घरो पर ही नमाज़ अदा करनी होगी।
उत्तर प्रदेश की तरफ से जारी दिशा निर्देश के मुताबिक सभी लोगों को घर में ही नमाज अदा करनी होगी। मस्जिद में सामूहिक नमाज अदा नहीं की जाएगी। कुर्बानी को लेकर गाइड लाइन में कहा गया है कि कुर्बानी खुले में नहीं होगी, साथ ही प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी नहीं दी जाएगी। धर्मगुरुओं से भी अपील की गई है कि वे इस गाइडलाइन के बाबत लोगों को जागरूक करें।
गाइडलाइन में पुलिस को भी निदेश दिए गए हैं कि “छोटी सी छोटी घटना का भी संज्ञान लिया जाए और जो भी विधिक कार्रवाई हो उसका पालन किया जाए। इस दौरान सोशल मीडिया पर किसी तरह की अफवाह न फैले इसके लिए क्षेत्राधिकारी को विशेष निर्देश दिए गए हैं।”
इस बार बकरी ईद का पर्व सोमवार को मनाया जा रहा है और इसी दिन सावन का आखिरी सोमवार भी है। इसे ध्यान में रखकर संवेदनशील इलाको में सुरक्षा के विशेष प्रबंध करने का प्रावधान है।


मुस्लिम धर्म गुरुओं और सपा सांसद ने सरकार से की थी मांग:
गौरतलब है कि बकरीद पर मस्जिदों में नमाज़ के आयोजन के लिए कई मुस्लिम संगठनों ने सरकार से अपील की थी। संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने भी उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की थी कि वह बकरीद को ध्यान में रखकर मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज़ के आयोजन की अनुमति दे।
वहीँ दारुल उलूल, देवबंद के प्रवक्ता मुफ्ती अशरफ उस्मानी ने राज्य सरकार को लिखे एक पत्र में सरकार से मांग की थी कि बकरी ईद पर मुसलमानो को कुर्बानी की रस्म पूरी करने की अनुमति दी जाए, साथ ही जानवरो की विक्री के लिए रोक हटाई जाए।
उन्होंने पत्र में कहा कि पत्र में कहा गया है कि जब अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद बाजार, शॉपिंग मॉल खोल दिए गए हैं तो मुसलमानो को मस्जिद में नमाज़ अदा करने की अनुमति दी जाए। साथ ही बकरी ईद के पर्व को ध्यान में रखते हुए शनिवार, रविवार को लॉकडाउन रखने की जगह सोमवार और मंगलवार को लॉकडाउन रखा जाए।
अशरफ उस्मानी ने पत्र में सरकार को बताया है कि एक इबादत के बदले दूसरी इबादत नहीं की जा सकती। नमाज़ के बदले ज़कात या ज़कात के बदले नमाज़ या हज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने पत्र में कहा कि कोरोना महामारी में सरकार द्वारा लागू किये गए लॉकडाउन को मुस्लिम समुदाय ने अपना पूरा समर्थन दिया है और सरकार के बताये हर नियम का पालन किया गया है। पिछले कई महीनो से मस्जिदें बंद हैं, सिर्फ चार पांच लोगों को ही मस्जिद में नमाज़ अदा करने की अनुमति के चलते सभी मुसलमान मस्जिद में नमाज़ अदा नहीं कर पा रहे हैं।
