आज़म खान परिवार की कांग्रेस से बढ़ती नज़दीकियों से सस्पेंस बढ़ा

लखनऊ ब्यूरो। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर प्रदेश की राजनीति नई दिशा में जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। सीतापुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी सांसद और प्रदेश के पूर्व केबिनेट मंत्री आज़म खान के परिवार की कांग्रेस से बढ़ती नज़दीकियों को लेकर अब खबरें सामने आने लगी हैं।

जहां एक तरफ समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आज़म खान की रिहाई के लिए समाजवादी पार्टी की तरफ से कोई बड़ा कदम न उठाये जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीँ यह खबर भी सामने आई है कि पिछले दिनों कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के दो दूत आज़म खान की पत्नी तंजीन फातिमा से लखनऊ में मिले थे।

सूत्रों की माने तो कांग्रेस से जुड़े दो नेताओं ने प्रियंका गांधी के संदेश के साथ आज़म खान की पत्नी से लखनऊ में मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद ही कई तरह के कयास लगने शुरू हो गए थे। हालांकि आधिकारिक तौर पर सपा नेता आज़म खान के परिजनों या कांग्रेस के किसी नेता ने इस मुलाकात की पुष्टि नहीं की है लेकिन पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस नेताओं के दिनों में उमड़े आज़म खान के प्रति प्रेम ने इस खबर पर मुहर अवश्य लगा दी है।

ये भी पढ़ें:  Rampur : पुलिस को नहीं पता कहां हैं आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला, तलाश जारी

सूत्रों के मुताबिक, आज़म खान का परिवार समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से नाराज़ है। इस नाराज़गी के पीछे अहम कारण आज़म खान की रिहाई के लिए समाजवादी पार्टी के कद्दावरों की ख़ामोशी बताई जाती है।

वहीँ आज़म खान द्वारा बनाई गई जौहर यूनिवर्सिटी पर भी कार्रवाही की तलवार लटकी है। माना जा रहा है कि इस यूनिवर्सिटी पर सरकार कभी भी बुलडोजर चलवा सकती है। ऐसे हालातो में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित तमाम कद्दावरों की ख़ामोशी आज़म परिवार को बेचैन कर रही है।

इस बीच खबर आई कि आज़म परिवार के ज़ख्मो पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मरहम लगाने की कोशिश की है। सूत्रों की माने तो प्रियंका गांधी ने आज़म खान की पत्नी से फोन पर बात करके कई मुद्दों पर बात की है। इतना ही नहीं इस बातचीत से पहले प्रियंका गांधी ने अपने दो दूत भी सन्देश लेकर आज़म खान की पत्नी तंजीन फातिमा से मिलने भेजे थे।

फ़िलहाल देखना है कि पूर्व केबिनेट मंत्री आज़म खान की रिहाई में कितना समय लगता है और क्या वे अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जेल से रिहा हो पाते हैं अथवा नहीं। जानकारों की माने तो आज़म खान की रिहाई के बाद प्रदेश की चुनावी तस्वीर तेजी से बदल सकती है।

अपनी राय कमेंट बॉक्स में दें
सत्य को ज़िंदा रखने की इस मुहिम में आपका सहयोग बेहद ज़रूरी है। आपसे मिली सहयोग राशि हमारे लिए संजीवनी का कार्य करेगी और हमे इस मार्ग पर निरंतर चलने के लिए प्रेरित करेगी। याद रखिये ! सत्य विचलित हो सकता है पराजित नहीं।
ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें