देश में आर्थिक आपातकाल लगना चाहिए या नहीं? दो हफ्ते बाद सुप्रीमकोर्ट करेगा सुनवाई

देश में आर्थिक आपातकाल लगना चाहिए या नहीं? दो हफ्ते बाद सुप्रीमकोर्ट करेगा सुनवाई

नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमित लोगों की बढ़ती तादाद के बीच चल रहे लॉकडाउन से कारोबार बंद पड़े हैं। कुछ एक कंपनियां ऐसी हैं जिन्होंने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की छूट दे रखी है। हालाँकि फैक्ट्रियों में काम काज पूरी तरह से बंद पड़ा है।

वहीँ लॉकडाउन के चलते कामकाज ठप्प होने से वित्तीय गतिविधियां पूरी तरह से ठहर गयी हैं। एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बिजनिस पूरी तरह से ठप्प हो गया है। ऐसे में सुप्रीमकोर्ट में एक याचिका दायर कर देश में आर्थिक आपातकाल लागू करने की मांग की गई है।

इस याचिका में याचिकाकर्ता सेन्टर फॉर अकाउन्टेबिलिटी एंड सिस्टेमिक चेंज नामक संगठन के अधिवक्ता विराग गुप्ता ने सुनवाई के दौरान 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान कामगारों के पलायन से संबंधित एक अन्य मामले में केन्द्र द्वारा मंगलवार को पेश स्थिति रिपोर्ट का हवाला दियाहै।

याचिका में कहा है कि अलग-अलग प्राधिकारियों के अलग-अलग निर्देशों की वजह से कोविड-19 की गंभीर स्थिति का सामना करने में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। इस लॉकडाउन की वजह से वित्तीय गतिविधियां ठहर गयी हैं। याचिका में कहा गया है कि इस स्थिति से निबटने के लिये संविधान के अनुच्छेद 360 के अंतर्गत देश में आर्थिक आपात काल लागू करने की आवश्यकता है।

इतना ही नहीं याचिका में न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि लॉकडाउन के दौरान केन्द्र को बिजली, पानी, गैस, टेलीफोन, इंटरनेट और कर्ज की मासिक किश्तों की वसूली का काम निलंबित करने का निर्देश दिया जाये। इसी तरह, राज्य पुलिस और संबंधित प्राधिकारियों को केन्द्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों पर पूरी तरह अमल करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है ताकि आवश्यक सेवाएं किसी भी तरह से बाधित नहीं हो सकें।

याचिका में कहा गया है कि केन्द्र ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को केन्द्र सरकार द्वारा जारी सभी निर्देशों और परामर्शों पर अमल करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था और उनके संगठन ने भी अपनी याचिका में इसी तरह का अनुरोध किया है।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने इस मामले की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई करते हुये कहा कि इस पर दो सप्ताह बाद विचार किया जा सकता है।

गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए एहतियातन 21 दिनों के टोटल लॉक डाउन के एलान किया गया है। लॉक डाउन के दौरान सिर्फ आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई को जारी रखा गया है। वहीँ लॉक डाउन के दौरान सभी यात्री ट्रेनों, बसों और फ्लाइटों को भी स्थगित रखा गया है। हालाँकि इमरजेंसी सेवाएं पुलिस, फायरब्रिगेड, बिजली-पानी की आपूर्ति को लॉक डाउन से बाहर रखा गया है।

TeamDigital