सुप्रीमकोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को जारी किया नोटिस, अब कल होगी सुनवाई
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार को अल्पमत में बताते हुए तुरंत फ्लोर टेस्ट कराये जाने की मांग को लेकर बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर सुप्रीमकोर्ट ने मुख्यमंत्री कमलनाथ, विधानसभा स्पीकर और विधानसभा सचिव को नोटिस जारी किया है। अब इस मामले में आगे की सुनवाई कल सुबह 10.30 बजे होगी।
गौरतलब है कि बागी 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद बीजेपी का आरोप है कि कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई है और उसे तुरंत विश्वास मत हासिल करना चाहिए।
वहीँ मुख्यमंत्री कमलनाथ का कहना है कि जब तक बेंगलुरु में रुके विधायकों को भोपाल वापस नहीं लाया जाता तब तक फ्लोर टेस्ट कराया जाना मुमकिन नहीं है। सोमवार को राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से कहा था कि वे मंगलवार (आज) फ्लोर टेस्ट कराएं।
वहीँ कल देर रात राज्यपाल से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मीडिया से बातचीत में कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि आज हमारी सरकार बहुमत में हैं, जिसे लगता हो कि सरकार बहुमत खो चुकी है वह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आये। हम अपना बहुमत साबित कर देंगे।
वहीँ दूसरी तरफ आज बागी 22 विधायकों ने बेंगलुरु में एक प्रेसकांफ्रेंस में साफ़ तौर पर कहा कि वे ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ हैं। बागी विधायकों ने इस बात इंकार किया कि उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है।
बागी विधायकों ने जो कुछ कहा उससे यह भी साफ़ हो गया कि बागी विधायकों को अपने सियासी भविष्य की चिंता है। बागी विधायकों ने यह भी कहा कि उन्होंने अभी बीजेपी में शामिल होने को लेकर कोई फैसला नहीं किया है।
कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे जिन 6 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किये जा चुके हैं, वही विधायक प्रेस कांफ्रेंस में चढ़बढ़कर हिस्सा ले रहे थे। इससे साफ़ है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ जिन विधायकों को भोपाल वापस लाने की मांग कर रहे हैं, उन विधायकों का रुख आज भी नरम है और वे कांग्रेस के साथ बने रह सकते हैं।
फिलहाल देखना है कि कल जब सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई होगी तो उसके बाद कोर्ट फ्लोर टेस्ट को लेकर क्या फैसला सुनाता है। यदि सुप्रीमकोर्ट तुरंत फ्लोर टेस्ट कराये जाने का फैसला सुनाता है तो संभावना कि कोर्ट बागी विधायकों को भोपाल लाने के निर्देश भी दे सकता है।
इससे पहले कल शुरू हुए विधानसभा के सत्र के पहले दिन राज्यपाल लालजी टंडन के अभिभाषण के बाद कोरोना वायरस के प्रकोप को ध्यान में रखकर विधानसभा 25 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई थी।
