यूपी पंचायत चुनाव: मतगणना पर रोक लगाने से सुप्रीमकोर्ट का इंकार

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावो की मतगणना रोकने से इंकार कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि मतगणना के दौरान या मतों की गिनती के बाद किसी प्रकार की विजय रैलियों की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

इससे पहले आज सुप्रीमकोर्ट ने चुनाव आयोग से कई सवाल किये। कोर्ट ने पूछा कि क्या मतगणना कराना जरूरी है? क्या उसे स्थगित नहीं किया जा सकता? अगर मतगणतना दो-तीन हफ्ते के लिए टाल दी गई तो क्या आसमान टूट पड़ेगा?

इस पर चुनाव आयोग ने अदालत को आश्वासन दिया कि मतगणना केंद्रों पर सभी कोरोना बचाव संबंधी नियमों का पालन कराया जाएगा। इतना ही नहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मतगणना केंद्रों के आसपास के उन सभी क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू किया जाएगा, जिनकी पहचान संबंधित अधिकारियों ने की है। आयोग ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वहां केवल अधिकृत प्रतिनिधि ही मतगणना केंद्रों तक जा सकेंगे।

चुनाव आयोग के आश्वासन पर सुप्रीमकोर्ट ने मतगणना रोकने से इंकार करते हुए निर्देश दिए कि चुनाव आयोग कर्फ्यू का सख्ती से पालन कराये तथा मतगणना पूरी होने तक कर्फ्यू जारी रहेगा।

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सुप्रीमकोर्ट ने यह भी कहा कि सभी मतगणना केंद्रों पर भी कोविड दिशानिर्देशो का सख्ती से पालन हो। हर मतगणना केंद्र में किसी तरह से दिशानिर्देशों का उल्लंघन होने पर वहां के अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे।

इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीमकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था। उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनावो को लेकर सुप्रीमकोर्ट में दायर की गई याचिका में पंचायत चुनाव कराये जाने के दौरान चुनाव ड्यूटी करते हुए जान गंवाने वालों का हवाला देते हुए मतगणना रोके जाने की मांग की गई थी।

उत्तर प्रदेश शिक्षक संघ ने निर्वाचन आयोग को करीब 706 शिक्षकों की मौत की सूची सौंपी है। शिक्षक संघ का दावा है कि इतनी बड़ी तादाद में शिक्षकों की मौत चुनाव में ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण लगने से हुई है।

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