अरब देशो में हिंदुत्व का एजेंडा आगे बढ़ाना चाहता था आरएसएस, भांडा फूटने पर जागे अरब देश
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भारतीय अप्रवासी कारोबारियों के माध्यम से अरब देशो में हिंदत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहता था लेकिन भांडा फूटने के बाद अब अरब देश इसके खिलाफ सक्रीय हो रहे हैं।
पार्स टुडे ने कोस्टल डाइजेस्ट की एक खबर खबर के हवाले से कहा कि 2016 में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अरब देशो के भारतीय हिन्दू कारोबारियों के साथ एक बैठक कर अरब देशो में हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कहा था।
पार्सटूडे ने कोस्टल डाइजेस्ट के हवाले से लिखा कि इस बैठक में यूएई स्थित एमएमसी समूह के संस्थापक व सीईओ डॉ. बीआर शेट्टी, यूएई एक्सचेंज के प्रमुख सुधीर कुमार शेट्टी, प्राकृति नेस्ट बिल्डर्स के एमडी व चेयरमैन एन. बालाकृष्ण, जेआर एयरोलिंक के एमडी अनिल पिल्लई और एनएमसी समूह के सीओओ प्रशांत मंगत का ख़ास तौर पर नाम लिया जा सकता है, जिन्होंने भागवत से ज़रूरी दिशा निर्देश लिए।
शेट्टी संयुक्त अरब इमारात में सबसे बड़ी हेल्थकेयर कंपनी एनएमसी हेल्थ के संस्थापक और सीईओ हैं। उनके बारे मशहूर है कि 70 के दशक में वह जब मेडिकल रिप्रेज़ेंटेटिव के रूप में अपने कैरियर की शुरूआत के लिए दुबई पहुंचे थे तो उनकी जेब में सिर्फ़ 8 डॉलर थे। 2019 में फ़ोर्ब्स ने उन्हें 3.15 अरब डॉलर की संपत्ति का मालिक बताया था।
खबर के मुताबिक पश्चिम एशियाई देशों में पॉवरफ़ुल हिंदुत्व लॉबी के प्रयासों से ही भारतीय प्रधान नरेन्द्र मोदी ने न केवल सऊदी अरब, यूएई और बहरैन जैसे देशों की यात्राएं कीं, बल्कि इन देशों के शासकों ने बाहें फैलाकर मोदी का स्वागत किया और उन्हें अपने देशों के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित भी किया। इसी क्रम में 2018 में यूएई की अपनी यात्रा के दौरान प्रधान मंत्री मोदी ने राजधानी अबू-धाबी में पहले हिंदू मंदिर की नींव भी रखी।
वहीँ अभी हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात में काम कर रहे कुछ भारतीयों द्वारा कोरोंना संक्रमण के लिए मुसलमानो और तब्लीगी जमात को ज़िम्मेदार बताते हुए ट्वीट किये जाने के बाद अरब देशो के बीच एकजुटता बढ़ी है।
मुसलमानो को निशाना बनाने वाले ट्वीट के खिलाफ जहाँ यूएई सरकार ने कई भारतीयों को बाहर का रास्ता दिखाया है वहीँ ट्विटर पर अचानक अरब देशो के दर्जनों ट्विटर हैंडलर से भारत में मुसलमानो को निशाना बनाये जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की गई।
इसी क्रम में अमीरात की राजकुमारी ने अरब देशो में काम करने वाले भारतीयों को चेतावनी दी कि नस्लवादी और भेदभावपूर्ण बयानबाज़ी करने वालों को सज़ा दी जाएगी और उन्हें यूएई से जाने पर मजबूर कर दिया जाएगा।
वहीँ अरब देशो से आई प्रतिक्रिया के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने ट्वीट में ज़ोर दिया कि कोविड-19 धर्म और जाति में कोई अंतर नहीं करता।
कुवैत के एक वकील और मानवाधिकार ग्रुप के डायरेक्टर मिजबिल अलशरीका ने ट्वीट किया कि वह भारत के मुसलमानों का मुद्दा बिना कोई फ़ीस लिए जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार परिषद में उठाएंगे।
कुवैत की मंत्री परिषद के जनरल सेक्रेट्रिएट से जारी बयान में कहा गया कि भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ जो लोग मानवता विरोधी अपराध कर रहे हैं और उनके अधिकारों का हनन कर रहे हैं, क्या वह समझते हैं कि दुनिया के मुसलमान इन अपराधों पर ख़ामोश रहेंगे और कोई राजनैतिक, क़ानूनी और आर्थिक कार्यवाही नहीं करेंगे?
इससे पहले इस मामले में आईसीसी ने भी भारतीय मुसलमानो की तस्वीर बिगाड़े जाने की कोशिशो की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया था। आईसीसी की तरफ से कहा गया था भारत में कोरोना संक्रमण के लिए मुसमानो को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है।
