नेपाल की संसद ने दी विवादित नक़्शे को मंजूरी, नए नक़्शे में उत्तराखंड के तीन इलाके भी
काठमांडू। नेपाल की संसद ने आज नेपाल के नए नक़्शे को मंजूरी दे दी है। इससे पहले नेपाल की संसद में नए मानचित्र को शामिल करने के लिए संवैधानिक संशोधन बिल पेश किया गया जो ध्वनि मंत से पारित हो गया।
निचले सदन में विपक्षी नेपाली कांग्रेस और जनता समाजवादी पार्टी नेपाल ने संविधान की तीसरी अनुसूची में संशोधन से संबंधित सरकार के विधेयक का समर्थन दिया। नेपाल की संसद ने 9 जून को आम सहमति से इस विधेयक के प्रस्ताव पर विचार करने पर सहमति जताई थी। जिसके बाद नेपाल का नया नक्शा को मंजूर किये जाने का रास्ता साफ हुआ।
नेशनल असेंबली से विधेयक के पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे संविधान में शामिल किया जाएगा। संसद ने नौ जून को आम सहमति से इस विधेयक के प्रस्ताव पर विचार करने पर सहमति जताई थी जिससे नए नक्शे को मंजूर किये जाने का रास्ता साफ होगा।
नेपाल के नए नक़्शे में उत्तराखंड के तीन इलाकों कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दर्शाया गया है। भारत ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम इस मामले में अपना पक्ष साफ कर चुके हैं। इस तरह का कृत्रिम विस्तार ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। यह कदम सीमा मुद्दे पर आपसी बातचीत और समझ के खिलाफ भी है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में भारत और नेपाल के बीच सीमा को लेकर नया विवाद पैदा हो गया है। नेपाल ने यह विवाद तब शुरू किया, जब भारत ने कैलाश-मानसरोवर जाने वाले बीहड़ मार्ग पर सड़क बनाते हुए चीन सीमा तक गाड़ी से पहुंचने की उपलब्धि का उद्घाटन किया था।
नेपाल का आरोप है कि भारत ने यह सड़क उसकी संप्रभुता वाले क्षेत्र में बनाई है। हालांकि भारत ने उसके दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। इसके बाद नेपाल ने लिपुलेख को अपना हिस्सा बताते हुए विरोध किया और 18 मई को नया नक्शा जारी किया था। इसमें भारत के तीन इलाके लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपना हिस्सा बताया।
