ममता-पवार में फिर हुई बात, बीजेपी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करेंगे पवार
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी से अकेले जूझ रहीं राज्य की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी ने एक बार फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार से फोन पर बात की है।
सूत्रों की माने तो ममता ने बीजेपी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने का जिम्मा एनसीपी सुप्रीम शरद पवार को दिया है। सूत्रों ने कहा कि ममता बनर्जी चाहती हैं कि बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में वामपंथी और कांग्रेस उनका साथ दें।
सूत्रों ने कहा कि फ़िलहाल शरद पवार ने ममता बनर्जी को आश्वासन दिया है कि वे इस बारे में जल्द ही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी तथा वामपंथी नेताओं से बातचीत करेंगे।
सूत्रों ने कहा कि शरद पवार ने ममता को यह भी भरोसा दिलाया है कि वे जल्द ही पश्चिम बंगाल को लेकर गैर बीजेपी दलों की एक बैठक भी आयोजित करने का प्रस्ताव रखेंगे। इस बैठक के ज़रिये एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में तृणमूल कांग्रेस, वामपंथियों और कांग्रेस को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश करेंगे।
ममता को कांग्रेस की शरण में आना होगा: अधीर रंजन चौधरी
वहीँ पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी भी बीजेपी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट होने की बात कह चुके हैं हालाँकि चौधरी ने इसे दूसरे लहजे में कहा। अधीर रंजन चौधरी ने गुरुवार को कहा, “मौजूदा जो दौर आ रहा है, उसमें मजबूरी में ही सही आश्रय लेने के लिए कांग्रेस के पास आना ही होगा।”
इतना ही नहीं अधीर रंजन चौधरी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि राज्य में चल रहे भगवाकरण के तूफान में तृणमूल कांग्रेस व्यावहारिक रूप से अस्त-व्यस्त हो गयी है। एक के बाद एक सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधि तृणमूल कांग्रेस छोड़ रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल का साथ छोड़ दिया है। आगे छोड़नेवालों की लंबी कतार है।
उन्होंने सीएम ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए कहा कि ‘राज्य की सत्ता में आने के बाद उन्होंने हर साजिश करके एक के बाद एक कांग्रेस विधायकों को तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने पर मजबूर किया।’ उन्होंने कहा, ‘आपने कांग्रेस विधायक को खरीदा, लेकिन कांग्रेस पार्टी खरीद नहीं पायीं।’
अधीर रंजन चौधरी ने आगे कहा कि विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद तृणमूल कांग्रेस को कांग्रेस के आगे हाथ पसारना होगा। उन्होंने ममता बनर्जी का नाम लिए बिना कहा कि आप याद रखें, आपको फिर से कांग्रेस में ही आना होगा। ऐसा कांग्रेस की जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि अपनी जरूरतों के लिए होगा। आप मजबूरी में ऐसा करेंगी.
