कृषि कानूनों के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाएगी ममता सरकार
कोलकाता। कृषि कानूनों के खिलाफ जहां देश के किसान पिछले एक महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं। वहीँ किसानो और सरकार के बीच अब तक हुई सभी बातचीत बेनतीजा साबित हुई हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने राज्य विधानसभा में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताब लाने का एलान किया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मैं किसानों के पक्ष में हूं और इन तीन बिलों को वापस लेने की मांग करती हूं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की राजनीतिक मंशा स्पष्ट है और इसीलिए वे इसे वापस नहीं ले रहे हैं।
वहीँ पश्चिम बंगाल में पीएम किसान सम्मान निधि योजना लागू करने को लेकर ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार उन लोगों का ब्योरा दे जिन्होंने इस बाबत आधिकारिक वेबसाइट पर खुद का पंजीकरण कराया है।
गौरतलब है कि कृषि कानूनों पर विरोध जताते हुए अभी हाल में केरल सरकार भी विधानसभा में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है। इससे पहले पंजाब सरकार भी कृषि कानूनों के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास कर चुकी है।
पश्चिम बंगाल में इस वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। बीजेपी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर राज्य के किसानो को प्रधानमंत्री किसान निधि से वंचित रखने का आरोप लगाती रही है।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने ममता सरकार को घेरा:
पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री किसान निधि लागू न होने पर राज्य के राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने ममता सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “सोचिए उस राज्यपाल पर क्या बीती होगी जो एक किसान का बेटा है। देश के अंदर 10 करोड़ किसानों को हर साल 6 हज़ार रूपए मिल रहे हैं लेकिन पश्चिम बंगाल के 70 लाख से ज़्यादा किसानों को यह नहीं मिला क्योंकि किसी ने हस्ताक्षर नहीं किए, जानकारी नहीं दी।”
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार लोकतंत्र की हत्या कर देता है। संरचनात्मक भ्रष्टाचार लोकतंत्र को नष्ट कर देता है। अगर सरकार की मदद से अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जाता है तो यह लोकतंत्र के ताबूत में आखिरी कील की तरह है।
