दिल्ली के बाद पटना में तेजस्वी के नेतृत्व में चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचे इंडिया गठबंधन के नेता

दिल्ली के बाद पटना में तेजस्वी के नेतृत्व में चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचे इंडिया गठबंधन के नेता

पटना। बिहार में वोटर लिस्ट जांच का मामले में अब विपक्ष ने चुनाव आयोग को घेरना शुरू कर दिया है। राज्य के विपक्षी दल चुनाव से ठीक पहले वोटर लिस्ट की जांच को गलत ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट जांच के लिए जिस तरह के कागजात मांगे जा रहे हैं उसके हिसाब से हजारों की संख्या में लोग मतदान देने से वंचित रह सकते हैं। अब इस मुद्दे को लेकर आरजेडी नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव बिहार चुनाव आयोग से मिले।

महागठबंधन के नेताओं के साथ राज्य चुनाव आयोग में आपत्ति दर्ज कराने के बाद तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने आयोग से मिलकर आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड को वैलिड डॉक्यूमेंट मानने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिहार में चुनाव आयोग के अधिकारी तो डाकिया हैं असली अधिकारी तो दिल्ली में बैठे हैं और वो किसी और ही जगह से संचालित होते हैं।

तेजस्वी ने कहा कि हमें संदेह है कि वोटरों के नाम पहले वोटर लिस्ट से, फिर राशन लिस्ट और फिर पेंशन लिस्ट हटाए जाएंगे. हमने चुनाव आयोग के सामने कई सवाल उठाए हैं. अभी बारिश हो रही है, कई जगहों पर जलभराव है, मानसून है. हमने टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठाए हैं कि आखिर 25 दिनों में ये संभव नहीं है. बाहर रहने वाले 4-5 करोड़ बिहारियों के लिए आप क्या करेंगे?

उन्होंने कहा कि हमने चुनाव आयोग से मांग की है कि दस्तावेजों को और सरल बनाए जाए. आधार कार्ड, जॉब कार्ड, मनरेगा कार्ड को शामिल किया जाए। जो दस्तावेज मांगे गए हैं वो बिहारियों के पास नहीं है। इस बार उन्होंने दस्तावेज से आधार कार्ड हटा दिया है। हमने मांग की है कि इसे शामिल किया जाए। बिहार के चुनाव को निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। निर्णय लेने का अधिकार दिल्ली वालों को है और हम सब जानते हैं कि उनके निर्णय कौन ले रहा है।

बता दें कि मतदाता सूचियों के पुनर्निरीक्षण के मुद्दे एक दिन पहले ही दिल्ली में इंडिया गठबंधन के 22 नेताओं ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर अपना विरोध जताया था। चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग की उदासीनता को लेकर सवाल उठाये थे।

TeamDigital