बिहार SIR पर सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई, कपिल सिब्बल की जोरदार बहस

बिहार SIR पर सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई, कपिल सिब्बल की जोरदार बहस

नई दिल्ली। बिहार में SIR के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई हो रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बिहार मतदाता सूची रिवीजन को लेकर सवाल उठाते हुए तीखी बहस की और चुनाव आयोग से कड़े सवाल पूछे।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पहले यह स्पष्ट करें कि एसआईआर प्रक्रिया कानून के मुताबिक है या नहीं। उन्होंने कहा कि हमें बताएं कि ऐसी प्रक्रिया जारी की जा सकती है या नहीं। अगर आप कहते हैं कि ऐसी प्रक्रिया सशर्त योजना के तहत अनुमत है, तो हम प्रक्रिया पर विचार करेंगे। अगर आप कहते हैं कि यह संविधान में ही नहीं है तो फिर उस हिसाब से विचार किया जायेगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि एक छोटे से निर्वाचन क्षेत्र में 12 लोग ऐसे हैं जिन्हें मृत दिखाया गया है, लेकिन वे जीवित हैं। बीएलओ ने कुछ नहीं किया है। ऐसे अनेको उदाहरण सामने आ रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें आपसे पूछना है कि कितने लोगों की पहचान मृत के रूप में हुई है। आपके अधिकारियों ने ज़रूर कुछ काम किया होगा। इस पर द्विवेदी ने कहा कि इतनी बड़ी प्रक्रिया में कुछ न कुछ त्रुटियां तो होंगी ही लेकिन मृत को जीवित कहना ठीक नहीं है।

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि बड़े पैमाने पर बहिष्कार हुआ है। 65 लाख लोग बाहर हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बड़े पैमाने पर हटाया जाना तथ्यों और आंकड़ों पर निर्भर करेगा।

कपिल सिब्बल ने कहा कि जहां किसी वर्ष के लिए रोल का गहन पुनरीक्षण किया जाना है, वहां उसे नए सिरे से तैयार किया जाएगा। जस्टिस कांत ने कहा तो बस इतना अंतर है कि संक्षिप्त पुनरीक्षण के मामले में नियम 4(2) लागू नहीं होगा। सिब्बल ने कहा कि नियमों के अनुसार (निवासियों को) कोई पत्र या फॉर्म 4 नहीं भेजा जाएगा। कोई दस्तावेज़ नहीं लिए जाएंगे।

कपिल सिब्बल ने कहा कि वे आधार स्वीकार नहीं कर रहे हैं, अगर मैं कहता हूं कि मैं नागरिक हूं, तो उनकी ज़िम्मेदारी है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। इसमें कहा गया है कि केवल जानकारी दी जानी है। सिब्बल ने नियम 13 का हवाला दिया। कपिल सिब्बल ने कहा कि कृपया फॉर्म 7 देखें और आपको पता चल जाएगा कि समस्या कहां है।

सिब्बल ने नियमों के तहत कहा कि नागरिक को कुछ साबित करने की ज़रूरत नहीं है। जो व्यक्ति मेरे शामिल होने पर आपत्ति कर रहा है, उसे साबित करना होगा। खबर लिखे जाने तक सुप्रीमकोर्ट में बहस जारी थी।

TeamDigital