किसानो का सरकार को अल्टीमेटम, “अब देशभर में रेलवे ट्रेको पर होंगे धरने “
नई दिल्ली। कृषि कानूनों को रद्द किये जाने की मांग पर अड़े किसान संगठनों ने आज केंद्र सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि हमने सरकार को 10 तारीख दी थी, जो आज पूरी हो गई। अब सरकार यह जान ले कि किसानो के धरने रेलवे ट्रेको पर होंगे।
सिंघु बॉर्डर पर किसान नेता बूटा सिंह ने कहा, “हमने 10 तारीख का अल्टीमेटम दिया हुआ था कि अगर PM ने हमारी बातों को नहीं सुना और कानूनों को रद्द नहीं किया तो सारे धरने रेलवे ट्रैक पर आ जाएंगे। आज की बैठक में ये फैसला हुआ कि अब रेलवे ट्रैक पर पूरे भारत के लोग जाएंगे। संयुक्त किसान मंच इसकी तारीख की जल्द घोषणा करेगा।”
उन्होंने कहा कि, “पंजाब में टोल प्लाजा, मॉल, रिलायंस के पंप, भाजपा नेताओं के दफ्तर और घरों के आगे धरना अभी भी जारी है। इसके अलावा 14 तारीख को पंजाब के सभी DC ऑफिसों के बाहर धरने दिए जाएंगे।”
किसान नेता ने कहा कि. “प्रधानमंत्री जी कहते है कि बातचीत जारी रहनी चाहिए और हमारा भी यही मानना है। वहीं दूसरी ओर कृषि मंत्री कहते हैं कि अगर किसान उनके संशोधनों को मानेंगे तो ही बातचीत जारी रहेगी, नहीं तो नहीं होगी। फिर से हमारे ऊपर शर्त लगा दी जाती है जिसकी हम निंदा करते हैं।”
बूटा सिंह ने कहा कि,”भाजपा नेताओं और हमारे मंत्रियों को कहना चाहूंगा कि एकजुट हो जाइए। प्रधानमंत्री कुछ और, गृहमंत्री कुछ और व कृषि मंत्री कुछ और बोल रहे हैं। विनती है कि हम एकजुट हैं और हमारी चुनी हुई सरकार को भी एकजुट होकर किसानों के पक्ष में फैसला लेना चाहिए।”
गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानूनों को वापस लेने की किसानो की मांग को नकारे जाने के बाद आज से किसान आंदोलन में तेजी आई है। सिंघु बॉर्डर पर आज 15वे दिन किसानो की तादाद में बढ़ोत्तरी हुई और किसानो का आना अभी भी जारी है।
पंजाब से बड़ी तादाद में किसान मोटरसाइकिलों और ट्रेक्टरो से सिंघु बॉर्डर पहुँच रहे हैं। वहीँ टिकरी बॉर्डर पर हरियाणा की तरफ से किसानो का आना जारी है। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह के साथ किसानो की बैठक के बाद सरकार की तरफ से भेजे गए लिखित मसौदे को किसानो ने ख़ारिज कर दिया था।
सरकार की तरफ से भेजे गए मसौदे पर चर्चा के लिए आयोजित किसान संगठनों की बैठक में सरकार के मसौदे के एक एक बिंदु पर चर्चा होने के बाद किसान नेताओं ने सरकारी मसौदे को एकजुटता से ख़ारिज कर दिया। किसानो ने एलान किया कि उन्हें कृषि कानूनों के रद्द होने से कम कुछ भी मंजूर नहीं होगा।
