लॉकडाउन में कैसे कर रहे जनता की सेवा, सपा के पूर्व विधायक आशीष यादव से सीधी बातचीत

लॉकडाउन में कैसे कर रहे जनता की सेवा, सपा के पूर्व विधायक आशीष यादव से सीधी बातचीत

जैसा की आप जानते है कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र देशभर में लागू लॉकडाउन को लेकर लोकभारत आप कों लगातर आपके जनप्रतिनिधियों से रूबरू करा रहा है औऱ उनसे जानने कोशिश कर रहा है कि वे लॉकडाउन के दौरान किस तरह जनता से संवाद कर रहे हैं और जन समस्यायों को हल करने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं

इसके अलावा आपके जनप्रतिनिधि किस तरह से लाकडाऊन का पालन कर रहे है, यह भी हम आप तक लगातार पहुंचा रहे हैं. इसी क्रम में आज हमारे सहयोगी विजय श्रीवास्तव ने समाजवादी के कद्दावर नेता, पूर्व विधायक एवं जिलाध्यक्ष आशीष यादव से एक्सक्लूसिव वाचचीत की. पढ़िए बातचीत के प्रमुख बिंदु

सवाल-लॉकडाउन 4 की घोषणा सरकार ने कुछ दिशा निर्देशो के साथ की है, क्या कहना है आपका?

जवाब-जैसा हम सभी जानते है कोरोना वायरस से बचने का एक ही रास्ता है लाकडाऊन और समाजिक दूरी, सरकार ने इसी को ध्यान में रखते हुऐ लाकडाऊन 4 की घोषणा की है लेकिन इससे कुछ नही होगा इसके साथ साथ सरकार को सेवाऐं भी देनी होंगी सरकार कुछ कहती है और कुछ करती है. सरकार ने लाकडाऊन के जो नियम बनाए है, उनका कड़ाई से पालन हो और लोगों को कुछ सहूलियत जरूर मिलनी चाहिए. प्रवासी मजदूरों की समस्या का हल जल्द सरकार तलाशना होगा नही स्थित और भी भी गंभीर हो जाऐगी. सरकार समर्थन मूल्य देने की बात करती है लेकिन नही दिया. सरकार किसानों को सीधा लाभ दे और गेंहू का मूल्य 500 रुपये बढ़ाया जाऐ. लाकडाऊन बढ़ाने में कोई दिक्कत नही है लेकिन आम लोगों की जिंदगी कैसे चले? सरकार को इस पर भी विचार करना चाहिऐ.

सवाल-सरकार और सरकार में बैठे लोग लगातार दावे कर रहें हैं कि सरकार ने अच्छा काम किया है. सरकार लगातर जनता की मदद कर रही है. इस पर आप क्या कहेंगे?

जवाब-जैसा हम सभी जानते हैं सरकार ने लोगों की क्या मदद की है. मै इस पर ज्यादा कुछ कहना नही चाहता फिर भी मै इतना कहूंगा कि अगर सरकार लोगों को राशन मुहैया कराती और लोगों की मदद करती तो आज गरीब जनता सड़कों पर नही होती, लेकिन सरकार ने ऐसा नही किया और आज लोग सड़कों पर निकलने को हजारों किलो मीटर पैदल चलने को मजबूर हो गये और पैदल चलने के दौरान लोगों की मौत हो गयी. आज भी हजारो लोग सड़कों पर पैदल चलने को मजबूर है और सरकार तय नही कर पा रहा है कि उन्हें बॉर्डर पर ही रोका जाऐ या उनको घर पहुचाया जाऐ. सरकार ने कोई अच्छा काम नही किया है और देश आज भी अच्छे दिनो की तलाश में है. मै खुद लाकडाऊन में फंसा हुआ हूँ. मैने अपने बेटे को दो महीने से नही देखा, और न उसने मुझे देखा है.

सवाल-देश और प्रदेशों में लगातर मरीजों की संख्या बढ़ रही है. अधिकतर बाहर से आये मजदूर कोरोना पॉजिटिव मिल रहें हैं?

जवाब-यह स्थित हमारे देश की ही नही बल्कि पूरी दुनिया की है, लेकिन हम सभी लोगों को इसका मुकाबला करना है. देश की सभी पार्टियों को मिलकर एक साथ तय करना चाहिए कि इस महामारी से कैसे लड़ा जाए. क्योंकि हर व्यक्ति का जीवन अनमोल है. कोरोना वायरस वर बिल्कुल भी राजनीत नही होनी चाहिऐ. हर व्यक्ति को इंसानियत नेता एक दूसरे की मदद करनी चाहिऐ तभी इस महामारी को हराया जा सकता है. लेकिन सबसे ज्यादा समस्या प्रवासी मजदूरों की है. आपके पास रेल है, बसें हैं, हवाई जहाज हैं. उसके बावजूद भी प्रवासी मजदूर पैदल सड़क पर चल रहें हैं और उनकी मौते हो रही हैं. यह बहुत ही निंदनीय है.

सवाल-प्रवासी मजदूरों की तस्वीरें सड़कों पर बिचलित करने वाली हैं. इस पर आप क्या कहेंगे?

जवाब-विजय जी, मै तस्वीरें देखकर विचलित हो जाता हूँ और सच कहूँ मुझे रोना आता है, क्यों कि प्रवासी मजदूरों की ऐसी ऐसी तस्वीरें आयी हैं, जिन्हे देखकर रोना आता है. मै सरकार से यही कहूंगा कि इनकी उचित व्यवस्था सरकार करे, जिससे कोरोना काल में यह तस्वीरें नही आनी चाहिऐ. जिससे लोगों के चेहरे पर फिर खुशहाली आ सके और कोरोना को हराया जा सके. इसके अलावा सरकार को कोरोना के टेस्ट बढ़ाने होंगे और लोगों को सुरक्षित अपने घर पहुंचाना होगा.

सवाल-बदायूं जनपद की जनता से क्या अपील करेंगे?

जवाब-मै अपने क्षेत्र की जनता से यही अपील करूंगा कि सभी लाकडाऊन के नियमों का पालन करें और समाज में इन्सानियत के नाते एक दूसरे की मदद करें. क्यों कि हमे इस कोरोना महामारी को हराना है. ज़रूरी से ज़रूरी कार्य होने पर ही घर से बाहर निकले. मास्क और सैनेटाइजर का उपयोग करें. समाजिक दूरी बनाकर ही रहें. खुद भी बचें और दूसरों को भी जागरूक करें.

TeamDigital